जालौन , जून 30 -- महर्षि वेदव्यास की जन्मभूमि एवं प्राचीन धार्मिक नगरी कालपी के ऐतिहासिक यमुना घाटों के संरक्षण और पुनर्जीवन की मांग को लेकर अधिवक्ता देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव एवं श्रद्धालुओं ने तहसील कालपी में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को राज्यपाल के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में किला घाट, बिहारी घाट, पीतांबर घाट, बाई घाट सहित सभी प्राचीन घाटों के तत्काल जीर्णोद्धार और यमुना की धारा को पुनः घाटों से जोड़ने की मांग की गई।
ज्ञापन में कहा गया कि कालपी यमुना तट पर बसी ऐतिहासिक एवं धार्मिक नगरी है, जहां स्थित प्राचीन घाट सदियों से आस्था, संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के केंद्र रहे हैं। प्रमुख पर्वों एवं धार्मिक तिथियों पर कालपी सहित आसपास के लाखों श्रद्धालु इन घाटों पर स्नान, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। लेकिन वर्षों से उपेक्षा, यमुना नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव और अनियंत्रित खनन के कारण इन घाटों की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है।
ज्ञापन में विशेष रूप से बाई घाट की जर्जर स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा गया कि देखरेख के अभाव में यह घाट विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुका है। घाट की अधिकांश सीढ़ियां टूट चुकी हैं और पूरा ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया है। वहीं पीतांबर घाट भी अत्यधिक क्षतिग्रस्त अवस्था में है। यह घाट मां वनखंडी देवी शक्तिपीठ के पूज्य महंत यमुनादास महाराज एवं पूज्य ऋषभ देव महाराज की प्रेरणा एवं संरक्षण में संचालित होता है, जहां प्रत्येक एकादशी पर सैकड़ों श्रद्धालु यमुना आरती में भाग लेते हैं।
श्रद्धालुओं ने बताया कि किला घाट कालपी का सबसे प्रमुख एवं ऐतिहासिक घाट है, लेकिन वर्तमान में यमुना की मुख्य जलधारा लगभग 300 मीटर दूर चली गई है। इससे श्रद्धालुओं को स्नान और धार्मिक अनुष्ठान करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की कि किला घाट और बिहारी घाट पर यमुना की धारा को वैज्ञानिक तरीके से चैनलाइज कर पुनः घाटों से जोड़ा जाए।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि प्रदेश सरकार प्राचीन संस्कृति और धरोहरों के संरक्षण के लिए लगातार दिशा-निर्देश जारी करती रही है। ऐसे में कालपी के ऐतिहासिक घाटों का भी तत्काल सर्वे कराकर विशेष संरक्षण योजना लागू की जानी चाहिए। साथ ही घाटों की नियमित साफ-सफाई, रखरखाव और सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
अधिवक्ता देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि कालपी के घाट केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत हैं। यदि समय रहते इनके संरक्षण की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां इस अमूल्य धरोहर से वंचित हो जाएंगी।
ज्ञापन देने वालों में भगवान दास खटीक, अफजल गुड्डू, सौरभ तिवारी, संतोष कुमार, लालू यादव, राकेश द्विवेदी, राजेश यादव, अमर सिंह चंदेल, कल्लू काशी खेड़ा, सुंदर, रामबाबू, मनीष, अशोक सहित अनेक श्रद्धालु एवं नागरिक उपस्थित रहे। उन्होंने शासन से कालपी के ऐतिहासिक घाटों के संरक्षण एवं पुनर्जीवन के लिए शीघ्र प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की।
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