तिरुवनंतपुरम , अक्टूबर 09 -- केरल में कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक में लिए गए निर्णयों को केवल आंशिक रूप से संतोषजनक करार देते हुए छोटे और मध्यम व्यापारियों पर कर का बोझ कम करने वाला बताया लेकिन साथ ही इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) से जुड़ी एक महत्वपूर्ण मांग को पूरा न किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त की है।कैट के राज्य अध्यक्ष पी. वेंकटरामा अय्यर और राज्य महासचिव एस. एस. मनोज ने कहा कि परिषद ने जीएसटी ढांचे के तहत ऐसे कुछ प्रावधानों, नियमों और प्रक्रियाओं में स्वागत योग्य बदलावों को मंजूरी दी है, जो छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए कठिनाइयां पैदा कर रहे थे और व्यापारियों को कानूनी जटिलताओं में उलझा रहे थे, लेकिन इसके बावजूद व्यापारिक समुदाय की मुख्य चिंता अभी भी बरकरार है।

कैट नेताओं ने इस बात पर निराशा जताई कि जीएसटी लागू होने के दसवें वर्ष में प्रवेश करने के बाद भी और बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद लंबे समय से लंबित आईटीसी मुद्दे को हल नहीं किया गया है। उन्होंने कोई अंतिम निर्णय लेने के बजाय इस मामले को आगे की जांच के लिए एक अन्य समिति के पास भेजने के लिए परिषद की आलोचना की और कहा कि इस फैसले को लगातार टालना व्यापारी समुदाय के साथ सरासर अन्याय है।

जीएसटी अधिनियम की धारा 16(2)(सी) का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में खरीदार की इनपुट टैक्स क्रेडिट की पात्रता को विक्रेता द्वारा सरकार को कर जमा करने से जोड़ा गया है, जो कि व्यावहारिक रूप से अनुचित है।

व्यापारी संगठन के नेताओं का तर्क है कि जब कोई ईमानदार व्यापारी वैध कर चालान और अन्य निर्धारित दस्तावेज प्राप्त करके विक्रेता को कर सहित पूरी राशि का भुगतान कर देता है, तो विक्रेता द्वारा बाद में कर जमा न करने या समय पर रिटर्न दाखिल न करने की सजा खरीदार को नहीं मिलनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह प्रावधान नियम-पालक खरीदारों को नुकसान में डालता है क्योंकि उनके कर लाभ उन आपूर्तिकर्ताओं की कार्रवाइयों पर निर्भर हो जाते हैं जिन पर उनका कोई नियंत्रण नहीं होता। देश भर के व्यापारियों के उठाई गई इन चिंताओं को न्यायालय की टिप्पणियों के बावजूद जीएसटी परिषद द्वारा धारा 16(2)(सी) में आवश्यक संशोधन कर ईमानदार खरीदारों को सुरक्षा न दिए जाने पर दुख जताते हुए कैट ने मांग की है कि कानूनी व वित्तीय देनदारियों को पूरा करने वाले व्यापारियों को आपूर्तिकर्ताओं की चूक के कारण आईटीसी से वंचित न किया जाए।

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