कानपुर , अक्टूबर 23 -- उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शुक्रवार को कानपुर के चुन्नीगंज स्थित कन्वेंशन सेंटर में ग्रामश्री एवं क्राफ्टरूट्स की ओर से आयोजित पांच दिवसीय 93वीं हस्तशिल्प प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने पारंपरिक कलाओं के संरक्षण, कारीगरों को उचित बाजार उपलब्ध कराने और उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर जोर दिया।

प्रदर्शनी में देश के 22 राज्यों के 90 से अधिक शिल्पकार अपनी कलाकृतियों और पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। इनमें फिरोजाबाद की कांच कला, छत्तीसगढ़ का कोसा सिल्क, मध्य प्रदेश का बाग प्रिंट और पश्चिम बंगाल की पट्टचित्र कला सहित विभिन्न राज्यों की हस्तशिल्प परंपराएं शामिल हैं। प्रदर्शनी में 50 रुपये से शुरू होने वाले उत्पाद उपलब्ध हैं। आगंतुकों को शिल्पकारों से सीधे संवाद करने, उनकी निर्माण प्रक्रिया समझने और उत्पाद खरीदने का अवसर भी मिल रहा है।

राज्यपाल ने विभिन्न स्टालों का अवलोकन कर शिल्पकारों से उनकी कलाकृतियों और पारंपरिक तकनीकों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने कहा कि हस्तनिर्मित प्रत्येक उत्पाद के पीछे कारीगर का परिश्रम, अनुभव और पीढ़ियों से अर्जित कौशल होता है। उनके हुनर को उचित बाजार, श्रम का सही मूल्य, प्रशिक्षण और सम्मान उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि क्राफ्टरूट्स जैसे आयोजन देश की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक कलाओं की समृद्धि को सामने लाने के साथ कारीगरों की आजीविका और आर्थिक सशक्तीकरण का माध्यम भी हैं। पारंपरिक कलाओं की मौलिकता बनाए रखते हुए उनमें नए डिजाइन और उपयोगी उत्पादों को शामिल करना आवश्यक है, ताकि उन्हें आधुनिक बाजार में भी पहचान मिल सके।

राज्यपाल ने कहा कि किसी परिवार को आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग देना भी बड़ा पुण्य का कार्य है। कारीगरों की आय बढ़ने से उनके परिवारों को बेहतर शिक्षा, पौष्टिक भोजन और स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकती हैं। उन्होंने कहा कि हस्तशिल्प को प्रोत्साहन देना केवल आर्थिक गतिविधि नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का भी प्रभावी माध्यम है।

आनंदीबेन पटेल ने जिलाधिकारी और जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि जनपद के पारंपरिक कलाकारों एवं शिल्पकारों की सूची तैयार कर उन्हें केंद्र और राज्य सरकार की पात्रतानुसार योजनाओं का लाभ दिलाया जाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय कलाकारों की प्रदर्शनियों के आयोजन के लिए प्रशासन उपयुक्त स्थान और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराए। उद्योगपतियों, अधिकारियों, विश्वविद्यालयों और आम नागरिकों से भी स्थानीय हस्तनिर्मित उत्पादों की खरीद को प्रोत्साहित करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि हस्तनिर्मित वस्तुओं का मूल्य तय करते समय कच्चे माल की लागत के साथ कारीगर के श्रम, समय, अनुभव और कौशल को भी महत्व दिया जाना चाहिए। कारीगरों को कारोबार बढ़ाने, कच्चा माल खरीदने और नए उत्पाद तैयार करने के लिए आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराना जरूरी है।

राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से अनुभवी शिल्पकारों को 'प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस' के रूप में जोड़ने और विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने की अपेक्षा की। उन्होंने कहा कि पारंपरिक कलाओं में दक्ष कारीगरों का अनुभव विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है। विश्वविद्यालयों में कार्यशालाएं आयोजित कर विद्यार्थियों को शिल्पकारों के साथ प्रत्यक्ष रूप से काम करने का अवसर दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि शिक्षा को कौशल और रोजगार से जोड़ना आवश्यक है, ताकि विद्यार्थी स्वरोजगार शुरू करने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें। स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कलाओं पर आधारित छोटे उद्यम अनेक परिवारों की आजीविका का आधार बन सकते हैं।

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