नयी दिल्ली , मार्च 23 -- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोक सभा में कारपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश किया, जिसे विचार के लिए संयुक्त संसदीय समिति को भेज दिया गया।
विधेयक का विरोध करते हुए कांग्रेस के मनीष तिवारी ने कहा कि विधेयक में संवैधानिक और कानूनी तौर पर खामियां हैं। यह जनहित में नहीं है।
तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने कहा कि विधेयक के प्रावधानों के अनुसार कंपनियों के सामाजिक उत्तर दायित्व कम कर दिये जायेंगे। कंपनियां लाभांश का दो प्रतिशत अंशदान सामाजिक दायित्वों के लिए करती हैं। इस विधेयक के कानून बनने से इसमें कमी आयेगी। इस प्रावधान में संशोधन करने की जरूरत नहीं है।
द्रमुक की डॉ टी सुमति ने भी विधेयक का विरोध किया।
इस पर श्रीमती सीतारमण ने कहा कि यह विधेयक दो वर्ष की चर्चा के बाद लाया गया है। यह विधेयक कारपाेरेट सुशासन और कंपनियों में अधिक निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। इसके बाद वित्त मंत्री ने विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति को भेजने का प्रस्ताव किया, जिसे ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि संयुक्त संसदीय समिति में दोनों सदनों के सदस्य होंगे, जिससे इस विधेयक पर दाेनों सदनों के सदस्यों के विचार आ जायेंगे।
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