पटना , अक्टूबर 24 -- ाज्य में कामगारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग ने कारखानों के निरीक्षण की व्यवस्था में बदलाव का निर्णय लिया है। राज्य में संचालित कल-कारखानों को जोखिम के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। उच्च जोखिम वाले कारखानों की जांच विभाग के वरिष्ठ अधिकारी करेंगे, जबकि मध्यम जोखिम वाली इकाइयों का सुरक्षा ऑडिट पैनलबद्ध विशेषज्ञों से कराया जाएगा।
विभाग का उद्देश्य कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना और संभावित दुर्घटनाओं को रोकना है। इसके लिए कारखानों में जोखिम के स्तर के अनुसार निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट की व्यवस्था की जाएगी।
विभाग ने कारखानों को निम्न, मध्यम और उच्च जोखिम की श्रेणियों में बांटने का निर्णय लिया है। सबसे कम जोखिम वाले कारखानों को निम्न जोखिम श्रेणी में रखा जाएगा। इससे अधिक जोखिम वाली इकाइयां मध्यम और सबसे अधिक जोखिम वाली इकाइयां उच्च जोखिम श्रेणी में शामिल होंगी।
निम्न जोखिम वाले कारखानों का विभागीय अधिकारी नियमित निरीक्षण नहीं करेंगे। हालांकि, किसी कारखाने में गंभीर दुर्घटना होने पर उसे निम्न जोखिम श्रेणी से हटाकर दूसरी श्रेणी में रखा जा सकता है।
उच्च जोखिम वाले कारखानों में विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जाकर जांच-पड़ताल करेंगे। निरीक्षण के बाद रिपोर्ट विभागीय सचिव और श्रमायुक्त को सौंपी जाएगी। इस श्रेणी में शामिल कारखानों की सुरक्षा व्यवस्था की गहनता से जांच की जाएगी, जिससे खामियों की पहचान कर आवश्यक सुधार सुनिश्चित किए जा सकें।
वहीं, मध्यम जोखिम वाले कारखानों की सुरक्षा ऑडिट थर्ड पार्टी यानी विभाग में पैनलबद्ध विशेषज्ञों के माध्यम से कराई जाएगी। इससे कारखानों में सुरक्षा मानकों के अनुपालन का आकलन किया जा सकेगा। विभाग की इस व्यवस्था से निरीक्षण प्रक्रिया को जोखिम के अनुरूप संचालित करने और कामगारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
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