शिमला , अक्टूबर 28 -- उच्चत्तम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने मंगलवार को संवैधानिक ढाँचे की समझ को गहरा करने के लिए कानूनी शिक्षा में भारतीय संविधान के 'मूल ढाँचे के सिद्धांत' पर एक व्यापक विषय शुरू करने का प्रस्ताव रखा।
न्यायमूर्ति खन्ना हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एचपीएनएलयू) में 'प्रस्तावना और मूल ढाँचे के सिद्धांत' न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्ण अय्यर वार्षिक विधि व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने प्रस्तावना के आरंभिक शब्दों 'हम, भारत के लोग' पर ज़ोर देते हुए कहा कि यह संविधान की नींव के रूप में लोगों की सामूहिक इच्छा को स्थापित करता है। उन्होंने रेखांकित किया इस प्रकार भारतीय संविधान स्वाभाविक रूप से समाजवादी और जन-उन्मुख है।
न्यायमूर्ति खन्ना ने 'मूल ढाँचा सिद्धांत' के केंद्रीय महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत के संवैधानिक ढ़ाँचे को बेहतर तरीके से समझने के लिए कानून के विद्यार्थियों के लिए एक व्यापक विषय की शुरूआत की जानी चाहिए। उन्होंने अपने न्यायिक दर्शन और मानवीय दृष्टिकोण के लिए जाने जाने वाले न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्ण अय्यर को भी श्रद्धांजलि अर्पित की।
न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया ने अध्यक्षीय भाषण देते हुए न्यायमूर्ति वी.आर. कृष्ण अय्यर के न्यायशास्त्र, विशेष रूप से संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत उनकी प्रगतिशील व्याख्याओं रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति अय्यर की व्याख्याओं ने मौलिक अधिकारों और मानवीय गरिमा के दायरे का विस्तार किया। उन्होंने जेल सुधारों और समाज के हाशिए पर पड़े तथा वंचित वर्गों के संरक्षण में न्यायमूर्ति अय्यर के ऐतिहासिक योगदान पर भी प्रकाश डाला।
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