कानपुर , जुलाई 8 -- उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में 16 से 22 जुलाई तक भूजल सप्ताह का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न विभागों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में आयोजित बैठक में सप्ताह भर चलने वाली गतिविधियों की विस्तृत कार्ययोजना पर चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ निर्धारित कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल वर्तमान की आवश्यकता नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है। वर्षा जल की प्रत्येक बूंद का संरक्षण और भूजल पुनर्भरण समय की सबसे बड़ी जरूरत है। शासन के निर्देशानुसार आयोजित होने वाले भूजल सप्ताह के दौरान व्यापक जनजागरूकता अभियान और संरक्षण संबंधी गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि जनपद के सभी अमृत सरोवर, तालाब, चेक डैम, नहरों, पारंपरिक जल स्रोतों और अन्य जल निकायों की साफ-सफाई, संरक्षण एवं पुनर्जीवन को प्राथमिकता दी जाए, ताकि वर्षा जल का अधिकतम संचयन कर भूजल स्तर में वृद्धि की जा सके।
उन्होंने सभी सरकारी कार्यालयों, संस्थानों और सार्वजनिक भवनों में स्थापित रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की साफ-सफाई एवं सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही जहां ऐसी व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, वहां वर्षा जल संचयन प्रणाली और रिचार्ज पिट विकसित करने को कहा।
भूजल सप्ताह के दौरान नलकूपों, चेक डैमों, तालाबों, अमृत सरोवरों, नहरों और अन्य जल संरक्षण स्थलों के आसपास वृहद वृक्षारोपण और विशेष स्वच्छता अभियान भी चलाया जाएगा। शिक्षा विभाग को जनपद की सभी 90 न्याय पंचायतों के परिषदीय विद्यालयों में जल संरक्षण विषय पर चित्रकला, निबंध और अन्य प्रतियोगिताएं आयोजित कराने के निर्देश दिए गए हैं। प्रत्येक न्याय पंचायत से दो श्रेष्ठ प्रविष्टियों का चयन कर कुल 180 प्रविष्टियां जनपद स्तर पर भेजी जाएंगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग भी प्रत्येक विकासखंड से उत्कृष्ट प्रविष्टियों का चयन कर प्रतिभागियों को सम्मानित करेगा।
जिला पंचायत राज विभाग को जनपद के सभी कुओं का चिन्हांकन कर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण के लिए 'कुआं पूजन' कार्यक्रम आयोजित कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा ग्राम पंचायत स्तर पर पेयजल एवं स्वच्छता समितियों की बैठकें और अभिमुखीकरण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
जिलाधिकारी ने कहा कि जल संरक्षण से जुड़े सभी स्थलों के आसपास अधिकाधिक वृक्षारोपण कराया जाए और नागरिकों को जल बचाने तथा वर्षा जल संचयन अपनाने की शपथ दिलाई जाए। उन्होंने कहा कि भूजल संरक्षण को जन-जन का अभियान बनाना होगा, तभी भविष्य में जल संकट का प्रभावी समाधान संभव हो सकेगा।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव जे. जैन, जिला हाइड्रोलॉजिस्ट, भूगर्भ जल विभाग, जिला पंचायत राज विभाग, सिंचाई विभाग सहित विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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