कानपुर , अप्रैल 8 -- कानपुर जिला प्रशासन ने खाद्य पदार्थों की शुद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सख्ती बरतते हुए 'सेफ फूड' अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में सरसैया घाट स्थित नवीन सभागार में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की जिला स्तरीय समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। जिलाधिकारी ने कहा कि हाल के दिनों में एक्सपायर्ड और खराब खाद्य पदार्थों को नई पैकेजिंग और डेटिंग के साथ बाजार में बेचने के मामले सामने आए हैं। उन्होंने ऐसे मामलों पर विशेष निगरानी रखते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही आमजन से अपील की कि इस प्रकार की गतिविधियों की सूचना खाद्य सुरक्षा विभाग को दें।
उन्होंने 'सेफ फूड' अभियान के तहत जनजागरूकता कार्यक्रम चलाने पर जोर देते हुए कहा कि उपभोक्ताओं को शुद्ध और अशुद्ध खाद्य पदार्थों की पहचान के प्रति जागरूक किया जाए, ताकि वे स्वयं भी सतर्क रह सकें।
जिलाधिकारी ने खाद्य पदार्थों में अजीनोमोटो के अत्यधिक प्रयोग पर नियंत्रण के निर्देश दिए और इसे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बताते हुए ऐसे विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा। इसके साथ ही फिंगर चिप्स, मोमो सॉस, बिरयानी सहित अन्य खाद्य पदार्थों में इंडस्ट्रियल रंगों के प्रयोग पर पूर्ण रोक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में रेड क्रॉस सोसायटी के सचिव आरके सफ्फड़ ने हॉस्टलों और अस्पतालों की कैंटीन में भोजन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित औचक निरीक्षण की आवश्यकता पर बल दिया।
सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन संजय सिंह ने बताया कि वर्ष 2025-26 में विभाग द्वारा 1237 छापे डालकर 1772 नमूनों का संग्रहण किया गया। इनमें 633 नमूने अधोमानक, 80 असुरक्षित और 37 मिथ्याछाप पाए गए। दूध के 163 नमूनों में 98, जबकि खोया, पनीर और मिठाइयों के 603 नमूनों में 395 नमूने मानक के अनुरूप नहीं पाए गए। अन्य खाद्य पदार्थों के 1006 नमूनों में 257 नमूने फेल पाए गए। इन मामलों में 584 वाद न्यायालय में दाखिल किए गए हैं। बैठक में एडीएम सिटी डॉ. राजेश कुमार, डीपीओ प्रीति सिंहा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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