चंडीगढ़ , फरवरी 18 -- पंजाब आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता जगरूप सिंह सेखवां ने बुधवार को कहा कि अकाली दल की कादियां रैली चुनाव क्षेत्र या पंजाब को बचाने के लिए नहीं, बल्कि एक परिवार के राजनीतिक हितों की रक्षा के लिए थी।

विधायक गुरदीप सिंह रंधावा के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान श्री सेखवां ने कहा कि कादियां में बादल दल की ओर से की गयी रैली चुनाव क्षेत्र के लोगों या पंजाब को बचाने के लिए नहीं थी। यह पूरी तरह से श्री बादल और बादल परिवार को की मुहिम थी। उन्होंने कहा कि हालांकि रैली को कादियां के कार्यक्रम के रूप में पेश किया गया था, लेकिन लोगों को पूरे पंजाब से लाया गया था, जिसमें गुरदासपुर जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों के साथ-साथ रोपड़, लुधियाना, होशियारपुर, तरनतारन और अमृतसर जैसे जिलों के लोग शामिल थे। उन्होंने कहा कि पूरे पंजाब से लोग इकट्ठा हुए थे। यूथ विंग के नेतृत्व ने पूरे राज्य से युवाओं को इकट्ठा किया था, फिर भी वहां कुछ भी बड़ा नहीं किया जा सका।

श्री सेखवां ने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की बार-बार घोषणाओं के बावजूद, शिरोमणि अकाली दल एक भी सार्थक बढ़ोतरी करने में विफल रहा। उन्होंने कहा कि वे घोषणा करते रहे कि 25 सरपंच शामिल होंगे, परंतु एक भी पंचायत सदस्य अकाली दल में शामिल नहीं हुआ। वे सिर्फ़ अपने पुराने कैडर को लाए थे, वही लोग जिन्हें वे पंजाब में जहां भी रैलियां करते हैं, अपने साथ ले जाते हैं।

शिरोमणि अकाली दल में बढ़ रही अंदरूनी फूट की ओर इशारा करते हुए जगरूप सिंह सेखवां ने कहा कि बिक्रम मजीठिया रैली में शामिल नहीं हुए। उन्होंने कहा कि माझा में यह पहली रैली थी। बिक्रमजीत मजीठिया माझा का बड़ा अकाली चेहरा हैं और कादियां में उनका न होना यह साबित करता है कि अकाली दल में अंदरूनी दरारें आ गयी हैं। दो बड़े पावर सेंटर बन गये हैं। सुखबीर और मजीठिया के बीच बहुत बड़ी खाई पैदा हो गई है। आने वाले समय में अकाली दल और भी टूट सकता है।

श्री सेखवां ने अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह के खुलासों का ज़िक्र करते हुए कहा कि उन्होंने यह उजागर किया है कि कैसे एक खास परिवार ने सिख संस्थाओं को व्यापार में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि एसजीपीसी मामलों में गड़बड़ियाँ हो रही हैं, गुरुद्वारे की ज़मीनें कौड़ियों के दाम बेची जा रही हैं और धार्मिक सेवाओं का व्यापारीकरण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पहले जहां 8,500 रुपये में पाठ होता था, अब संगत से पांच लाख रुपये तक लिए जा रहे हैं और डेरों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

श्री बादल की पंजाब पर राज करने का एक और मौका देने की मांग पर सवाल उठाते हुए श्री सेखवां ने कहा कि लोगों ने बादल परिवार को पांच बार सत्ता दी। उन्होंने उस सत्ता का क्या किया? बेअदबी की घटनाएं हुईं, गुरमीत राम रहीम को माफ कर दिया, हमारे सिंहों को शहीद कर दिया और फिर अकाल तख्त साहिब गये, सब कुछ माना, माफी मांगी, पैसे लिए और बाद में मुकर गये।

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