शिमला , अगस्त 01 -- हिमाचल प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने शनिवार को राज्य की कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाया कि वह भाजपा नेताओं और निर्वाचित प्रतिनिधियों को निशाना बनाने के लिए पुलिस एवं प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग कर 'प्रतिशोध की राजनीति' कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा शासन में लोकतांत्रिक संस्थानों को कमजोर किया जा रहा है।

श्री ठाकुर ने यहां संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने लगभग चार वर्ष के कार्यकाल में अपना ध्यान शासन और विकास से हटाकर राजनीतिक टकराव पर केंद्रित कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि रोजगार, विकास और कानून व्यवस्था जैसे जनहित के मुद्दों का समाधान करने के बजाय सरकार राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ मामले दर्ज करने और इसके कामकाज की आलोचना करने वालों को डराने-धमकाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद कांग्रेस सरकार ने कई सार्वजनिक संस्थानों को बंद कर दिया और विकास कार्यों को रोक दिया, जिसके बाद उसने विपक्षी नेताओं के खिलाफ एक अभियान शुरू किया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार के खिलाफ जनता का आक्रोश बढ़ा है और हाल ही में संपन्न हुए पंचायती राज तथा शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में भाजपा का प्रदर्शन इस जनभावना को दर्शाता है।

श्री ठाकुर ने आरोप लगाया कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल, विधायक सुधीर शर्मा, होशियार सिंह और आशीष शर्मा, पूर्व मंत्री सुखराम चौधरी तथा पार्टी के कई अन्य नेताओं के नाम या तो एफआईआर में दर्ज किये गये हैं, उन्हें जांच के दायरे में लाया गया है या फिर वे प्रशासनिक उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा में शामिल हुए कांग्रेस के पूर्व नेताओं के साथ-साथ उनके परिजनों और सहयोगियों को भी चुन-चुनकर निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय निकाय चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवारों को हराने के बाद भाजपा के जिला परिषद सदस्यों, पंचायत प्रधानों, नगर पार्षदों और अन्य निर्वाचित प्रतिनिधियों को नोटिस दिये जा रहे हैं और उनकी जांच करायी जा रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ हैं और सरकारी तंत्र के दुरुपयोग को दर्शाते हैं।

कानून व्यवस्था की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए श्री ठाकुर ने आरोप लगाया कि हिंसक अपराध और महिलाओं के खिलाफ अपराध की घटनाएं बढ़ रही हैं, जबकि सरकार का पूरा ध्यान केवल राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ मामले दर्ज करने पर लगा हुआ है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी स्वतंत्र रूप से काम करने के बजाय राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं।

हिमाचल प्रदेश पुलिस के बैंड 'हार्मनी ऑफ पाइन्स' से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए श्री ठाकुर ने कहा कि महिला पुलिसकर्मियों के लगाये गये आरोपों की निष्पक्ष और तटस्थ जांच होनी चाहिए। उन्होंने कार्रवाई में देरी पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस प्रकरण ने महिला कर्मचारियों को न्याय दिलाने की सरकार की प्रतिबद्धता पर सवाल खड़े कर दिये हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने फोन टैपिंग और निगरानी के आरोपों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यदि निर्वाचित प्रतिनिधियों या विपक्षी नेताओं की गैर-कानूनी तरीके से निगरानी की जा रही है तो यह लोकतांत्रिक स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन है।

उन्होंने ऐसे सभी आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की। श्री ठाकुर ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के कामकाज को लेकर कांग्रेस के भीतर भी असंतोष व्याप्त है। उन्होंने मुख्यमंत्री को राजनीतिक बयानबाजी के बजाय शासन-प्रशासन पर ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार की भी आलोचना करते की और कहा कि सरकार विपक्ष को निशाना बनाकर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक कामकाज से जुड़े सवालों से बच रही है।

भाजपा के अगले राजनीतिक अभियान की घोषणा करते हुए श्री ठाकुर ने कहा कि पार्टी कांग्रेस सरकार के कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय कुप्रबंधन, प्रशासनिक तंत्र के दुरुपयोग, जनविरोधी फैसलों और सत्ता के दुरुपयोग को लेकर एक विस्तृत आरोप-पत्र तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज साक्ष्यों के साथ तैयार किया जायेगा और राज्यव्यापी जनसंपर्क अभियान के जरिये जनता के सामने रखा जायेगा।

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