पुणे , जून 30 -- महाराष्ट्र में राजनीतिक दलों के विलय के नए सिरे से लग रहे कयासों के बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के भीतर भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
राकांपा (शरद पवार) के भीतर किसी दूसरे दल में विलय के सवाल पर आसन्न विभाजन का संकेत देने वाली रिपोर्टें भले ही धरातल पर नहीं उतरी हैं, लेकिन पार्टी के वरिष्ठ सूत्रों ने स्वीकार किया है कि पार्टी की दीर्घकालिक राजनीतिक रणनीति को लेकर आंतरिक मतभेद उभर आए हैं। सियासी गलियारों में इसे 'ऑपरेशन तुतारी' कहा जा रहा है। गौरतलब है कि राकांपा (शरद पवार ) का चुनाव चिन्ह तुतारी (तुरही) बजाता हुआ व्यक्ति ही है।
शरद पवार के भतीजे अजीत पवार (अब दिवंगत) के नेतृत्व में हुए विभाजन के बाद से शरद पवार गुट को संगठनात्मक और चुनावी झटकों का सामना करना पड़ा है। पार्टी के दोनों गुटों के संभावित विलय के पिछले प्रयासों में कुछ समय के लिए तेजी आई थी, और यहां तक कि शरद पवार गुट के भीतर से भी कुछ पहल की गई थी। हालांकि, वे चर्चाएं तब से ठंडी पड़ चुकी हैं।
इस पृष्ठभूमि में, पार्टी की भविष्य की दिशा को लेकर विचार-विमर्श शुरू हो गया है। इसमें सूत्रों का कहना है कि दो स्पष्ट दृष्टिकोण आकार ले रहे हैं।
नेताओं का एक समूह कांग्रेस के साथ विलय के पक्ष में दिख रहा है। उनका तर्क है कि कांग्रेस पार्टी ही राकांपा की वैचारिक जननी रही है। इस विचार के समर्थकों का मानना है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का अधिक प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए समान वैचारिक जड़ों वाले विपक्षी दलों का एकीकरण आवश्यक है, और कांग्रेस के साथ एक औपचारिक गठबंधन अधिक संगठनात्मक ताकत और राजनीतिक गहराई प्रदान कर सकता है।
वहीं दूसरी ओर, दूसरा समूह पार्टी की स्वतंत्र पहचान बनाए रखने के पक्ष में है। इस खेमे के नेताओं का तर्क है कि विलय का रास्ता चुनने के बजाय पार्टी को अपनी आजादी को बनाए रखना चाहिए और अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता की रक्षा के लिए सत्तारूढ़ गठबंधन के साथ व्यावहारिक संबंध बनाए रखने चाहिए।
माना जा रहा है कि अजीत पवार के साथ न जाने का फैसला करने वाले कई नेता भी इसी दूसरे नजरिए का समर्थन कर रहे हैं।
पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि भाजपा के बढ़ते राजनीतिक प्रभाव, क्षेत्रीय दलों के सामने बढ़ती चुनौतियों और अनुभवी नेता शरद पवार की बढ़ती उम्र व स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं ने कई नेताओं को पार्टी की भविष्य की रणनीति पर दोबारा सोचने के लिए प्रेरित किया है।
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