लखनऊ , फरवरी 13 -- उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पांचवें दिन शुक्रवार को गंगा एक्सप्रेसवे पर पिछले दिनों हुए दर्दनाक हादसे का मुद्दा सदन में जोरदार तरीके से उठा। कांग्रेस की नेता विधानमंडल दल आराधना मिश्रा और ऊंचाहार से विधायक मनोज पांडेय ने कार्य स्थगन प्रस्ताव के तहत सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया।

आराधना मिश्रा ने कहा कि जिस गंगा एक्सप्रेसवे पर अभी तक आधिकारिक रूप से यातायात शुरू नहीं हुआ, उसी पर रायबरेली में एक तेज रफ्तार वाहन ने 9 महिलाओं को रौंद दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस वाहन का पांच बार पहले चालान हो चुका था, वह आखिर सड़क पर कैसे दौड़ रहा था? क्या निगरानी और प्रवर्तन तंत्र पूरी तरह विफल हो चुका है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं की बढ़ती घटनाएं चिंताजनक हैं, लेकिन उन्हें गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। एक सड़क दुर्घटना सिर्फ एक व्यक्ति की जान नहीं लेती, बल्कि पूरे परिवार को आर्थिक और सामाजिक संकट में डाल देती है ।

वहीं, मनोज पांडेय ने बताया कि हादसे की शिकार महिलाएं और युवतियां एक भंडारे से लौट रही थीं। सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुंचे और घायलों के उपचार की व्यवस्था कराई। उन्होंने कहा कि मृतकों के परिजनों को तीन-तीन लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है।

उन्होंने सदन में यह भी बताया कि दो घायल मीना और रिया की हालत बेहद गंभीर है और उनके इलाज पर लगभग ढाई-ढाई लाख रुपये का खर्च आ रहा है। उन्होंने मांग की कि इनके उपचार की व्यवस्था विधायक के विवेकाधीन कोटे से कराई जाए।

मनोज पांडेय ने यह भी सवाल उठाया कि संबंधित सड़क अभी निर्माणाधीन थी और औपचारिक रूप से हैंडओवर नहीं हुई थी। ऐसे में ठेकेदार ने उस पर निजी वाहनों की आवाजाही कैसे होने दी? उन्होंने इस मामले में ठेकेदार की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की मांग की।

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