जोधपुर , जनवरी 11 -- केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने 'विकसित भारत जी राम जी' योजना को लेकर विपक्ष के नेताओं की आलोचना का जवाब देते आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने दशकों तक मनरेगा को भ्रष्टाचार की 'दुधारू गाय' बनाकर लूटा है लेकिन अब मोदी सरकार की पारदर्शिता से इन भ्रष्टाचारियों के पेट में दर्द हो रहा है।
श्री शेखावत ने रविवार को यहां सर्किट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में इतिहास के पन्ने पलटते हुए कहा कि आज जो लोग इस मनरेगा योजना के पैरोकार बन रहे हैं, उनके अपने दिग्गजों ने ही इसकी विफलता की पुष्टि की थी। जब शरद पवार 10 साल तक देश के कृषि मंत्री थे, तब उन्होंने संसद और सार्वजनिक मंचों पर बार-बार चिंता जताई थी कि मनरेगा कृषि क्षेत्र के लिए एक बड़ी बाधा बन गई है। उन्होंने इसे दुरुस्त करने और इसमें संशोधन की मांग की थी। श्री शेखावत ने कहा कि कांग्रेस के ही नेता जयराम रमेश ने खुद लोकसभा के पटल पर स्वीकार किया था कि मनरेगा केवल खड्डे खोदने और उन्हें भरने तक सीमित रह गई है, इससे कोई 'एसेट क्रिएशन' या संरचनात्मक निर्माण नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जब 14वें वित्त आयोग ने राज्यों का हिस्सा 32 प्रतिशत से बढ़ाकर 42 प्रतिशत (प्रभावी रूप से 47 प्रतिशत) किया, तब जोधपुर के हमारे अपने मुखिया भी उस मांग के स्टेकहोल्डर थे। राज्यों को अतिरिक्त 15 प्रतिशत पैसा इसी शर्त पर दिया गया था कि वे इसका उपयोग ग्रामीण विकास में करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि गहलोत सरकार ने उस धन को विकास के बजाय तुष्टीकरण और मुफ्त की रेवड़ियों में उड़ा दिया।
श्री शेखावत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी एवं प्रियंका गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों कई बार मनरेगा के भ्रष्टाचार पर प्रश्न खड़े कर चुके हैं। खुद उन्होंने माना था कि राज्यों में यह योजना लूट का जरिया है लेकिन आज जब हम 'जी-राम-जी' के जरिए टेक्नोलॉजी और पारदर्शिता ला रहे हैं तो उन्हें इसमें दोष दिख रहा है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा में मजदूरों की जगह मशीनों से काम कराया गया और 80 साल के बुजुर्गों के फर्जी नाम लिखकर पैसे डकारे गए। पश्चिम बंगाल के 19 जिलों में ऑडिट हुआ और सभी में अनियमितताएं पाई गईं। विपक्षी राज्यों ने इसे अपने राजनीतिक कार्यकर्ताओं को वित्त-पोषित करने का जरिया बना लिया था। 11 लाख से ज्यादा शिकायतें भारत सरकार के पास लंबित थीं, जिन्हें अब 'जी-राम-जी' मिशन के तहत हल किया जा रहा है।
श्री शेखावत ने विरोधियों को आंकड़ों से जवाब देते हुए कहा कि संप्रग के 10 साल में मात्र एक लाख करोड़ खर्च हुए थे जबकि मोदी सरकार ने 11 साल में 4 लाख करोड़ से अधिक का निवेश किया है। नई योजना में रोजगार गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है। यदि समय पर भुगतान नहीं हुआ तो सरकार को पेनाल्टी के साथ भुगतान करना होगा। यदि सरकार रोजगार देने में विफल रही तो मजदूर को अनिवार्य रूप से मुआवजा मिलेगा। जल संरक्षण (अमृत सरोवर), रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर, आजीविका संवर्धन और प्राकृतिक आपदा संबंधित चीजों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
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