बेंगलुरु , अप्रैल 10 -- कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस ने दावणगेरे दक्षिण के उपचुनाव में पार्टी की जीत की उम्मीदों पर अंदरूनी साजिश की बात स्वीकार की है जिसमें कहा जा रहा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।

विधान परिषद सदस्य सलीम अहमद और विधायक रिजवान अरशद ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अंदरूनी सर्वे के आधार पर साफ जीत का अनुमान है और इसके साथ ही पार्टी के अंदर "साज़िशों" और रणनीतिक गलतियां भी सामने आयी है।

श्री अहमद ने दावा किया कि कांग्रेस की गारंटी योजनाओं के खिलाफ गलत जानकारी वाले अभियान के बावजूद, मतदाता खासकर अल्पसंख्यक पार्टी के पीछे एकजुट हो गए थे। उन्होंने हालांकि आरोप लगाया कि वरिष्ठ नेताओं के एक ग्रुप ने पार्टी की संभावनाओं को कमजोर करने के लिए पर्दे के पीछे काम किया तथा यह बात मुख्यमंत्री सिद्दारमैया सहित राज्य और केंद्रीय नेतृत्व दोनों को पता थी।

उन्होंने कहा, "हमारे आतंरिक सर्वे से साफ़ पता चलता है कि कांग्रेस बागलकोट और दावणगेरे दोनों में जीत की ओर बढ़ रही है। हमारी गारंटी योजनाओं के ख़िलाफ़ लगातार गलत जानकारी फैलाने के बावजूद, लोग खासकर अल्पसंख्यक हमारे साथ मज़बूती से खड़े रहे हैं। हमारे अपने वरिष्ठ नेताओं के एक ग्रुप ने पार्टी को हराने की साज़िश की, लेकिन मतदाताओं ने ऐसी कोशिशों को नकार दिया। मुख्यमंत्री समेत नेतृत्व को इसके बारे में पूरी जानकारी है।"उन्होंने माना कि टिकट बंटवारे पर अंदरूनी मतभेद - खासकर अल्पसंख्यक उम्मीदवार को मैदान में उतारने की मांग से भ्रम हुआ और आखिरकार अभियान को नुकसान हुआ। उन्होंने माना कि कई विकल्प देने के बजाय अब्दुल जब्बार समेत एक ही नाम को चुनना एक "रणनीतिक गलती" साबित हुयी।

कांग्रेस नेताओं ने भाजपा और दूसरे विपक्षी गुटों द्वारा फैलाई जा रही इस बात का भी विरोध किया कि अल्पसंख्यकों के साथ "धोखा" हुआ है। अरशद ने ज़ोर देकर कहा कि सभी फ़ैसले मिलकर लिए गए थे और अल्पसंख्यक नेताओं ने रणदीप सिंह सुरजेवाला और सिद्धारमैया की नेतृत्व में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद सक्रिय अभियान किया था। उन्होंने कहा, "हां, अल्पसंख्यक उम्मीदवार की मांग थी, लेकिन हम बड़ी सहमति नहीं बना पाए - यह हमारी गलती थी। कई उम्मीदवार के नाम बताने के बजाय खुद को एक ही नाम तक सीमित रखना एक रणनीतिक गलती साबित हुई।"श्री अरशद ने इस मुकाबले को सिर्फ चुनावी लड़ाई से कहीं ज़्यादा बताते हुए, भाजपा और आरएसएस पर बांटने वाली राजनीति को हवा देने और अल्पसंख्यकों के बीच कांग्रेस पार्टी की छवि खराब करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने चेतावनी दी कि भाजपा की जीत से दावणगेरे में सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता है।

उन्होंने कहा, "अल्पसंख्यक नेताओं को 'देशद्रोही' कहना पूरी तरह गलत है - सभी फैसले मिलकर लिए गए थे। भाजपा और आरएसएस बंटवारा करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेस अकेली धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा के लिए लड़ रही है। अगर भाजपा जीतती है, तो दावणगेरे में शांतिपूर्ण माहौल बिगड़ सकता है।" दोनों नेताओं ने अंदरूनी कलह के बावजूद कहा कि सभी समुदायों के बीच बड़े पैमाने पर समर्थन से आखिरकार कांग्रेस की जीत पक्की होगी - जिससे उपचुनाव सिर्फ चुनावी ताकत का ही नहीं, बल्कि पार्टी की अपनी कमियों को ठीक करने की क्षमता का भी टेस्ट बन जाएगा।

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