रामनगर , मार्च 12 -- उत्तराखंड में वन ग्रामों को राजस्व गांव घोषित करने और ग्रामीणों को जमीन का मालिकाना हक देने की मांग को लेकर गुरुवार को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के नेतृत्व में रामनगर में पदयात्रा निकाली गई। पदयात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया।
"जल, जंगल, जमीन हमारी" के नारों के साथ निकली इस पदयात्रा में रामनगर ब्लॉक प्रमुख मंजू नेगी, ज्येष्ठ ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी, पूर्व दर्जा राज्य मंत्री पुष्कर दुर्गापाल समेत कई गांवों से आए कई ग्रामीण शामिल हुए। यह यात्रा रामनगर महाविद्यालय से शुरू होकर तहसील परिसर में सम्पन्न हुई, प्रतिभागियों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर "धामी सरकार होश में आओ", "हम चाहे राजस्व गांव" और "वन ग्रामों को मालिकाना हक दो" जैसे नारे लगाए। यह पदयात्रा रामनगर शहर के विभिन्न मार्गों से होकर गुजरी और अंत में तहसील परिसर पहुंचकर उप जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने के साथ समाप्त हुई।
इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री रावत ने कहा कि सरकार गरीबों की जमीनों के साथ अन्याय कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आपदा पीड़ितों और भूमिहीनों को जमीन उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, जबकि पहले एक सोच के तहत मालधन, बिंदुखत्ता और रामनगर के पुछड़ी जैसे क्षेत्रों में गांव बसाए गए थे।
उन्होंने कहा कि वन ग्रामों को राजस्व गांव बनाने की प्रक्रिया उनकी सरकार के समय शुरू की गई थी, उस वक़्त मंत्रिमंडल में प्रस्ताव लाकर 12 श्रेणियों की जमीनों को वर्गीकृत किया गया था, जिसमें इंदिरा गांव, हरिराम आर्य गांव समेत पहाड़ से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक के कई गांवों को मालिकाना हक देने की बात कही गई थी।
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