जयपुर , सितम्बर 05 -- राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की निकाय चुनाव में भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री सहित नेताओं के आने पर की गई टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कहा है कि कांग्रेस द्वारा जारी किये गये विजन पर जिस तरह लोगों की ठंडी प्रतिक्रिया हुई और सवाल उठाये गये है उससे कांग्रेस की यह खीझ सामने आ रही है।
श्री राठौड़ ने शनिवार को अपने बयान में कहा कि अपने आपको राजनीति का खिलाड़ी और जादूगर कहने वाले व्यक्ति से इस तरह की नौसीखिया और बचकानी टिप्पणी करने की आशा नहीं थी। उन्होंने कहा कि हर राजनीतिक दल की अपनी व्यवस्था होती है और भाजपा का अपना एक संगठनात्मक और राजनीतिक प्रबंधन है।
उन्होंने कहा कि आपातकाल लगा कर जनता के अधिकार छीनने वाली, चुनी हुई राज्य सरकारों को बर्खास्त करने वाली कांग्रेस के नेता लोकतंत्र की बात करते है तो ऐसे लगता है सौ चूहें खाकर बिल्ली चली हज को की कहावत चरितार्थ कर रहे है। मुख्यमंत्री जनता के बीच में जाए, उनसे संवाद करें, वहां रोड शो करें इसमें श्री गहलोत या कांग्रेस नेताओं को मानसिक तनाव क्यों है वे भी जायें उन्हें कौन रोकता है, पर वह जानते हैं कि पेपर लीक, भ्रष्टाचार जैसे उनके पाप आज भी उनका पीछा नहीं छोड़ते।
उन्होंने कहा कि श्री गहलोत और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पहले तय कर ले कि उनके पास खुद का फीडबैक क्या है जो कल श्री डोटासरा जीत का दावा कर रहे थे और आज श्री गहलोत घबराहट दिखा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल उठाना और खुद के हित में अगर जनता का निर्णय आ जाए तो बल्लियां उछलना कांग्रेस का पुराना पेशा और खेल है। लोकतंत्र में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का सम्मान होता है और उनके प्रति यदि अविश्वास जनता में बनाने की कोशिश की जाती है तो वह अर्बन नक्सली सोच है जो देश और समाज के लिए भयानक है।
श्री राठौड़ ने कहा कि भाजपा बरसों तक विपक्ष में रही पर कभी लोकतांत्रिक संस्थाओं, वैधानिक संस्थाओं पर सवाल नहीं उठाये, जनता के निर्णय को स्वीकार्य किया और यही कारण है कि जनता में भाजपा के प्रति साख और विश्वास बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस बार-बार अपने पुराने काम को बता रही है तो यह जनता है सब जानती है काम किया होता, जनता के विश्वास पर खरे उतरे होते, कोई कमी नहीं होती तो जनता विधानसभा चुनाव में सत्ता से बाहर का रास्ता नहीं दिखाती। कांग्रेस में लोकतंत्र कैसा है और उसका लोकतांत्रिक प्रक्रिया में कितना भरोसा है यह बीकानेर में अपने ही एक दलित जिला अध्यक्ष की सरेआम होती पिटाई और महिला कार्यकर्ताओं से कांग्रेस के विधायकों द्वारा व्यक्तिगत मेरे लिए क्या किया जैसे सवाल के साथ दिखाई देते है।
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