जयपुर , नवंबर 01 -- राजस्थान के भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने दिल्ली के रामलीला मैदान में कांग्रेस की रैली को जनता द्वारा बार-बार नकारे गए लोगों का राजनीतिक नाटक बताते हुए कहा हुकि संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा का दावा करने से पहले कांग्रेस को अपने इतिहास का जवाब देना चाहिए।

श्री राठौड़ ने रविवार को कांग्रेस रैली पर अपनी प्रतिक्रिया में यह बात कही। उन्होंने कहा कि सत्ता के लिए नागरिक स्वतंत्रता, न्यायपालिका की स्वायत्तता और संघीय व्यवस्था से जुड़े सवाल कांग्रेस के शासनकाल में भी उठे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को विरोध करने का पूरा अधिकार है लेकिन विरोध के नाम पर अराजकता और अस्थिरता का माहौल बनाना उचित नहीं है। त्योहारों के समय दिल्ली के व्यापारियों, दुकानदारों और आम नागरिकों को शांति एवं सुरक्षित माहौल की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस को राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर उठकर देश की एकता, सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का सम्मान करना चाहिए।

श्री राठौड़ ने कहा कि एक नवंबर का दिन 1984 के सिख नरसंहार की दर्दनाक यादों से जुड़ा है। उस दौरान हजारों सिख परिवार उजड़ गए, किसी ने बेटा खोया, किसी ने अपना सिंदूर, किसी के माथे से पिता का साया चला गया तो कोई बेटी मां की ममता से वंचित हो गई। देश उन जख्मों को आज भी नहीं भूला है। तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के 'जब बड़ा पेड़ गिरता है, तो धरती कांपती है' वाले बयान को लेकर आज भी सवाल उठते हैं। कांग्रेस को पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना, जवाबदेही और प्रायश्चित का परिचय देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लोकतंत्र की दुहाई देने से पहले कांग्रेस के अतीत और 1984 के सिख नरसंहार के प्रति अपनी पार्टी की जिम्मेदारी पर जवाब देना चाहिए। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां सरकारों का भविष्य जनता तय करती है। राजनीतिक प्रदर्शनों के जरिए जनादेश को कमजोर नहीं किया जा सकता। देश की शांति, सुरक्षा, संप्रभुता और लोकतांत्रिक व्यवस्था सर्वोपरि हैं तथा जनता अराजकता की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी।

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