नयी दिल्ली , अप्रैल 16 -- कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भले ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को महिला आरक्षण विधेयक का चैंपियन बताने का प्रयास कर रहे हों लेकिन सच यह है कि महिलाओं को आरक्षण देने की बात कांग्रेस ने शुरू की और उसी अवधारणा के बल पर आज देश में महिला आरक्षण विधेयक पारित हो सका है।

श्रीमती वाड्रा ने "संविधान 131 संशोधन विधेयक 2026" पर लोकसभा में जारी चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए कि कांग्रेस महिलाओं की सुरक्षा और आरक्षण के पक्ष में दृढ़ता से खड़ी रही है और आगे भी खड़ी रहेगी लेकिन श्री मोदी के बयान से प्रतीत होता है कि भाजपा महिला आरक्षण की अगुआ, समर्थक और सबसे बड़ी हिमायती रही है। उन्होंने कहा कि 2019 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर महिला आरक्षण विधेयक लाने की बात कही थी और उनका पत्र मिलने के बाद ही मोदी सरकार ने 2023 में सर्वसम्मति से इस विधेयक को पारित किया और कांग्रेस ने अपनी विचारधारा के अनुरूप इस विधेयक का पूर्ण समर्थन किया था।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार को नहीं भूलना चाहिए कि महिलाओं को आजादी के पहले दिन से ही वोट देने का अधिकार मिल गया था। इस संदर्भ में कांग्रेस की भूमिका का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मोतीलाल नेहरू ने साल 1928 में एक रिपोर्ट तैयार की थी, जिसे उन्होंने कांग्रेस पार्टी की कार्यसमिति को सौंपा था। मोतीलाल नेहरू तब एक समिति के अध्यक्ष थे और उन्होंने 19 मूल अधिकारों की सूची बनाई थी। फिर 1931 में सरदार पटेल की अध्यक्षता में कराची अधिवेशन हुआ जिसमें इस प्रस्ताव को पारित किया गया। यहीं से भारत की राजनीति में महिलाओं के समान अधिकार की बात शामिल हुई। उसी समय 'वन वोट वन सिटीज़रन वन मूल्य' का सिद्धांत हमारी राजनीति में लागू हुआ। इस सिद्धांत की वजह से हमारे देश में महिलाओं को वोट देने का अधिकार आजादी के पहले दिन से ही मिल गया। जबकि अमेरिका जैसे देश में महिलाओं को इस अधिकार के लिए 150 साल इंतजार करना पड़ा था।

कांग्रेस नेत्री ने कहा कि हमारे यहां महिलाओं को पंचायत में 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया। कांग्रेस की सरकारों ने महिलाओं को आरक्षण देने का जो सिलसिला शुरू किया उसी के परिणाम में महिलाओं को आज देश में आरक्षण मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी का मजाक उड़ाते हूं लेकिन घर पर जाकर वह निश्चित रूप से उनकी बातों पर चिंतन करते होंगे और इसी का परिणाम है कि महिला आरक्षण विधेयक को लागू करने के लिए वह कदम उठा रही है। इस बारे में श्री गांधी ने ही प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जल्द से जल्द इस विधेयक को लागू करने की मांग करने संबंधी पत्र लिखा था।

श्रीमती वाड्रा ने कहा कि जब सरकार इस विधेयक को लेकर आई थी तो कांग्रेस ने विधेयक का समर्थन किया था और आज भी इस विधेयक की पक्ष में डटकर खड़ी है लेकिन सच यह है कि आज की चर्चा दरअसल महिला आरक्षण पर नहीं है। सरकार जो विधेयक लेकर आई है उसका स्वरूप ही बदला गया है। विधेयक में राजनीति की 'बू' पूरी तरह से घुली हुई है। सवाल है कि सरकार इस विधेयक पर जल्दबाजी क्यों कर रही है। सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर आगे बढ़ रही है और परिसीमन करवा रही है क्योंकि सरकार कमजोर वर्गों को लाभ नहीं देना चाहती है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री घबरा रहे हैं इसलिए ओबीसी को जातिगणना में शामिल नहीं कर उनके हक को कम करना चाहती है। उनका कहना था कि सरकार किसी भी वर्ग के हक को कम नहीं कर सकती है। उनका कहना था कि महिलाओं की भागीदारी किस तरह की होगी इसका कहीं भी विधेयक में जिक्र नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रक्रिया को ना करना चाहती है और अपने राजनीतिक फायदे के लिए नई सीमाएं निर्धारित करना चाहती है और उसी तरह का षड्यंत्र इस विधेयक के जरिए भी किया जा रहा है। उनका कहना था कि इस विधेयक में परिसीमन आयोग के तीन लोग ही देश की 140 करोड लोगों के भाग्य का फैसला करेंगे।

श्रीमती वाड्रा ने कहा कि सरकार एक तरफ महिला आरक्षण विधेयक ला रही है तो दूसरी तरफ ओबीसी का हक मार रही है और राज्यों के अधिकारों को कम किया जा रहा है। विधेयक समय पर सदस्यों को नहीं दिया गया ताकि इस पर ठोस चर्चा नहीं कर सके। उनका कहना था कि सत्ता बनाए रखने के लिए लोगों के साथ अन्याय करना अनुचित है। सरकार लगातार जाति जनगणना जैसे मुद्दे को नकार रही है। उनका कहना था कि सरकार यदि सच पर चलकर काम करना चाहती है तो वर्तमान लोकसभा सीटों के आधार पर महिलाओं को आरक्षण दिया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि सरकार को देश की महिलाओं को उनका हक देना चाहिए और ईमानदारी से उनके हितों के लिए और पूरी जिम्मेदारी के साथ काम करना चाहिए।

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