नयी दिल्ली , जुलाई 03 -- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने को लेकर विपक्षी दलों पर निंदा करते हुए कहा है कि कांग्रेस का शासन मॉडल सिर्फ़ तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार की राजनीति, साथ ही कट्टरपंथियों का सहयोग करना है।
गौरतलब है कि इंडिया गठबंधन के 23 विपक्षी दलों तथा एक निर्दलीय सांसद ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए शुक्रवार को कहा कि भाजपा कुछ राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश को लिखे गए पत्र की कड़ी निंदा करती है। ये अपनी पार्टियों को जातिगत जागीर की तरह चलाते हैं, लगातार आम लोगों की भावनाओं का अपमान करते हैं और इसी वजह से बार-बार नाकाम होते हैं। भाजपा लोकतंत्र पर चोट करने की उनकी नाकाम कोशिश की भी निंदा करती है।
उन्होंने कहा कि केरल में कांग्रेस नेता शशि थरूर ने एक टेलीविजन साक्षात्कार में स्वीकार किया था कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया से कांग्रेस को लाभ हुआ क्योंकि वामपंथी शासन के दौरान दर्ज फर्जी मतदाताओं को मतदाता सूचियों से हटा दिया गया था। हाल ही में कर्नाटक में श्री डीके शिवकुमार ने पार्टी कार्यकर्ताओं को एसआईआर प्रक्रिया में सहयोग करने का निर्देश दिया था। फिर भी आज कांग्रेस उसी प्रक्रिया पर हमला कर रही है। यह विरोधाभास कांग्रेस पार्टी के इरादों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
भाजपा नेता ने कहा कि एसआईआर को भिन्न-भिन्न न्यायालयों ने पूर्णतया युक्तिसंगत और विधिसम्मत ठहराया है। यह पहले भी समय-समय पर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग द्वारा होता रहा है। संवैधानिक नज़रिए से देखें तो विपक्षी पार्टियाँ एक बार भी अदालत के सामने कोई ठोस तथ्य पेश नहीं कर पाई हैं और संदिग्ध वोटरों के दम पर राज्यों में सत्ता हासिल करने का उनका सपना अब टूटता हुआ दिख रहा है।
श्री त्रिवेदी ने कहा, "कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मुख्य न्यायाधीश को को लिखे गए पत्र में जिस भाषा-शैली का इस्तेमाल किया गया है, वह वैसी ही अहंकारी भाषा-शैली है जो आपातकाल के दौरान देखी गई थी।"उन्होंने कहा, कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियां सिर्फ़ विपक्ष में ही नहीं हैं। वे कुछ राज्यों में सरकार भी चला रही हैं। मैं जानना चाहता हूँ कि उनका शासन मॉडल क्या है! सिर्फ़ तुष्टिकरण और भ्रष्टाचार की राजनीति, साथ ही कट्टरपंथियों का सहयोग ही आपका शासन मॉडल है।"उन्होंने कहा कि आप चुनाव आयोग और लोकतंत्र पर आरोप लगाते हैं, लेकिन कभी गांधी परिवार से सवाल नहीं पूछते, जो समाजवादी पार्टी की मदद के बिना अपनी अमेठी सीट भी नहीं जीत पाये।
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