भोपाल , अक्टूबर 30 -- मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर प्रदेश की आर्थिक स्थिति और उद्योग-रोजगार को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर "हर महीने कर्ज लेने की संस्कृति और करप्शन को सरकारी मिशन बना लेने" का आरोप लगाते हुए कहा है कि वर्ष 2025 को "उद्योग एवं रोजगार वर्ष" घोषित कर जनता को जो बड़े-बड़े सपने दिखाए गए थे, वे पूरी तरह खोखले साबित हुए हैं।

पटवारी ने अपने पत्र में लिखा कि सरकार ने एक वर्ष में 30.77 लाख करोड़ रुपये के निवेश का दावा किया, लेकिन सरकारी दस्तावेज बताते हैं कि इनमें से मात्र 6.20 लाख करोड़ की योजनाओं पर ही आंशिक प्रगति हुई। उन्होंने कहा कि यह स्थिति प्रदेश के युवाओं के साथ धोखा है, क्योंकि वादे के मुताबिक लाखों रोजगार सृजित करने की बात कही गई थी, जबकि वास्तविकता में "रोजगार का आंकड़ा शून्य" है।

उन्होंने उद्योग, ऊर्जा, आवास, एमएसएमई, कौशल विकास, स्वास्थ्य और खाद्य प्रसंस्करण जैसे प्रमुख विभागों में निवेश की प्रगति को केवल "आंकड़ों की बाजीगरी" करार दिया। पटवारी ने कहा कि उद्योग विभाग में 12.70 लाख करोड़ के प्रस्ताव में से मात्र 2.48 लाख करोड़, नवीकरणीय ऊर्जा में 5.72 लाख करोड़ में से केवल 1.78 लाख करोड़, और पीडब्ल्यूडी में 1.30 लाख करोड़ में से सिर्फ 8,314 करोड़ के प्रोजेक्ट ही आगे बढ़ पाए।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मोहन सरकार ने "निवेश-नौटंकी" के नाम पर जनता को गुमराह किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री से मांग की है कि प्रदेश की आर्थिक सच्चाई सामने लाने के लिए एक विशेष जांच टीम गठित की जाए, जिसमें चार पूर्व मुख्यमंत्रियों उमा भारती, कमलनाथ, शिवराज सिंह चौहान और दिग्विजय सिंह को शामिल किया जाए। इस टीम को मुख्यमंत्री मोहन यादव का सहयोग सुनिश्चित किया जाए ताकि "फर्जी निवेश और बेरोजगारी के आंकड़ों" की सच्चाई उजागर हो सके।

पटवारी ने यह भी आग्रह किया है कि मध्यप्रदेश सरकार निवेश और रोजगार को लेकर तत्काल श्वेत पत्र (व्हाईट पेपर) जारी करे, जिसमें हर विभाग की प्रगति और वास्तविक आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं। साथ ही, जिन्होंने जनता को गुमराह किया और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग किया, उन अधिकारियों और मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई हो।

पत्र में पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश अब राजनीतिक जुमलेबाजी से आगे बढ़कर ठोस परिणाम चाहता है। प्रदेश की जनता "इवेंट कल्चर" नहीं बल्कि रोजगार, निवेश और विकास की वास्तविकता देखना चाहती है।

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