रायपुर , सितंबर 22 -- छत्तीसगढ़ के कथित कस्टम मिलिंग घोटाले की जांच कर रहे प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अब खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में राइस मिलर्स को दी जाने वाली विशेष प्रोत्साहन राशि 40 रुपए से बढ़ाकर 120 रुपए प्रति क्विंटल किए जाने की प्रक्रिया की पड़ताल शुरू कर दी है। राज्य सरकार ने इससे संबंधित करीब 350 पेज के दस्तावेज ईडी को उपलब्ध कराए हैं।

सूत्रों के अनुसार ईडी को सौंपे गए दस्तावेजों में निर्णय प्रक्रिया से जुड़ी नोटशीट, बैठकों के रिकॉर्ड, विभागीय पत्राचार और राइस मिलर्स एसोसिएशन की ओर से दिए गए आवेदन शामिल हैं। एजेंसी अब इन दस्तावेजों के आधार पर यह पता लगा रही है कि प्रोत्साहन राशि में तीन गुना वृद्धि का प्रस्ताव किन परिस्थितियों में तैयार हुआ, इसे किस स्तर पर मंजूरी मिली और इस प्रक्रिया में किन अधिकारियों तथा संस्थाओं की भूमिका रही।

ईडी के अनुसार खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में कस्टम मिलिंग के लिए दी जाने वाली विशेष प्रोत्साहन राशि 40 रुपए से बढ़ाकर 120 रुपए प्रति क्विंटल की गई थी। जांच एजेंसी का आरोप है कि इसके बाद मिलर्स से दो किस्तों में 20-20 रुपए प्रति क्विंटल की कथित अवैध वसूली की गई। कथित रकम नहीं देने वाले राइस मिलर्स के बिलों का भुगतान रोककर उन पर दबाव बनाया जाता था।

जांच में तत्कालीन मार्कफेड प्रबंध निदेशक मनोज सोनी और छत्तीसगढ़ स्टेट राइस मिलर्स एसोसिएशन के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रोशन चंद्राकर की भूमिका सामने आने का दावा किया गया है। एजेंसी के अनुसार जिला राइस मिलर्स एसोसिएशन से कथित वसूली की जानकारी संबंधित जिला विपणन अधिकारियों तक पहुंचती थी और मिलर्स के बिलों का उससे मिलान किए जाने के बाद भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ती थी।

ईडी ने वर्ष 2024 में श्री सोनी और श्री चंद्राकर को गिरफ्तार किया था। दोनों के खिलाफ ईडी ने विशेष पीएमएलए अदालत में अभियोजन शिकायत भी दाखिल की थी, जिस पर अदालत ने संज्ञान लिया था। ईडी ने अपनी जांच में प्रोत्साहन राशि बढ़ाए जाने के बाद बड़े पैमाने पर कथित किकबैक जुटाए जाने का आरोप लगाया है। मामले में आगे की जांच जारी है।

कस्टम मिलिंग से जुड़ा मामला वर्ष 2023 में जांच एजेंसियों की कार्रवाई के बाद प्रमुखता से सामने आया था। अक्टूबर 2023 में ईडी ने तत्कालीन मार्कफेड प्रबंध निदेशक सोनी और प्रदेश के कुछ राइस मिलर्स से जुड़े ठिकानों पर तलाशी ली थी। जांच एजेंसी ने इसके बाद मार्कफेड अधिकारियों और राइस मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों की कथित मिलीभगत से अवैध वसूली किए जाने का आरोप लगाया था।

ईडी के अनुसार प्रोत्साहन राशि बढ़ाए जाने के बाद मिलर्स से प्रति क्विंटल 20 रुपए प्रति किस्त की कथित वसूली की व्यवस्था बनाई गई थी। जिन राइस मिलर्स से रकम मिलने की जानकारी संबंधित एसोसिएशन के माध्यम से पहुंचती थी, उनके बिलों को भुगतान के लिए आगे बढ़ाया जाता था, जबकि कथित रकम नहीं देने वालों के भुगतान को लंबित रखने का आरोप है।

इस मामले में जांच के दौरान अक्टूबर 2023 तथा मई-जून 2024 में अलग-अलग स्थानों पर तलाशी की कार्रवाई भी की गई थी। ईडी ने इस दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य मिलने का दावा किया था। अक्टूबर 2023 की तलाशी में 1.06 करोड़ रुपए की बेहिसाब नकदी जब्त किए जाने का उल्लेख भी जांच एजेंसी ने किया है।

ईडी की जांच से सामने आई जानकारी के आधार पर राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने वर्ष 2024 में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। मामले में श्री चंद्राकर, प्रीतिका, सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस अनिल टुटेजा, एजाज ढेबर, सिद्धार्थ सिंघानिया और रामगोपाल अग्रवाल सहित अन्य लोगों के नाम सामने आए।

ईओडब्ल्यू की जांच में आरोप लगाया गया कि कस्टम मिलिंग की प्रोत्साहन राशि के भुगतान की आड़ में राइस मिलर्स से अवैध रकम वसूली जाती थी। जांच एजेंसी के अनुसार जो मिलर्स कथित रकम देते थे, उनके भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ती थी, जबकि रकम नहीं देने वालों के बिल रोके जाते थे।

जांच में कस्टम मिलिंग के अलावा डीओ काटने, मोटे और पतले धान की श्रेणी में बदलाव तथा एफसीआई और नान से संबंधित प्रक्रियाओं के नाम पर भी कथित रकम लिए जाने के आरोप सामने आए हैं। एजेंसियों का आरोप है कि इस व्यवस्था में मार्कफेड के कुछ अधिकारियों के साथ छत्तीसगढ़ स्टेट राइस मिलर्स एसोसिएशन से जुड़े पदाधिकारी भी शामिल थे।

ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी आरोप लगाया गया कि तत्कालीन कांग्रेस कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल तक कथित कमीशन की रकम पहुंचाई जाती थी। वहीं श्री चंद्राकर पर श्री सोनी के साथ मिलकर प्रति क्विंटल 20 रुपए की कथित रिश्वत वसूलने का आरोप लगाया गया। ये आरोप अभी न्यायिक परीक्षण के अधीन हैं।

ईओडब्ल्यू ने जांच के दौरान यह भी दावा किया था कि कथित कमीशन की रकम का इस्तेमाल यात्राओं में किया गया और मनोज सोनी तथा रोशन चंद्राकर के परिवार कश्मीर सहित विभिन्न स्थानों की यात्रा पर गए। जांच एजेंसी ने संपत्ति में निवेश से जुड़े दस्तावेज मिलने का भी दावा किया था। ईओडब्ल्यू के अनुसार कथित वसूली से मनोज सोनी ने 15.44 करोड़ रुपए की अवैध आय अर्जित की।

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