बेंगलुरु , अगस्त 01 -- जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि केंद्र शासित प्रदेश की दीर्घकालिक आर्थिक समृद्धि सरकारी अनुदान या सार्वजनिक खर्च से नहीं, बल्कि विश्वास, मजबूत संस्थाओं और उद्यमिता को बढ़ावा देने से सुनिश्चित होगी।
श्री अब्दुल्ला ने शनिवार को आईआईएमबीएए लीडरशिप कॉन्क्लेव-2026 को संबोधित करते हुए कहा कि सरकारें सड़कें, स्कूल और अस्पताल बना सकती हैं, लेकिन स्थायी आर्थिक विकास तभी संभव है जब लोगों को विश्वास हो कि उनके प्रयासों को अवसर और सफलता मिलेगी।
उन्होंने कहा, "विश्वास सबसे उत्पादक बुनियादी ढांचा है। सरकार की जिम्मेदारी केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है। उसे लोगों का विश्वास बहाल करना, अनिश्चितता कम करना और यह भरोसा पैदा करना भी जरूरी है कि मेहनत का उचित प्रतिफल मिलेगा।"मुख्यमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में उद्यमिता सबसे महत्वपूर्ण उत्पादक संसाधन है। उन्होंने स्वतंत्रता के बाद जम्मू-कश्मीर में हुए भूमि सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस तरह उस दौर में भूमि का व्यापक स्वामित्व ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास का आधार बना, उसी प्रकार आज अधिक से अधिक लोगों को उद्यमिता से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि उद्यमिता भूमि की तरह वितरित नहीं की जा सकती, बल्कि इसके लिए मजबूत संस्थागत ढांचा तैयार करना होगा। सरकार की भूमिका व्यवसाय खड़ा करने की नहीं, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करने की है, जिसमें उद्यमिता विकसित हो सके।
श्री अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर का भविष्य लोगों को वित्त, बाजार, प्रौद्योगिकी और मार्गदर्शन उपलब्ध कराकर उन्हें अपना कारोबार शुरू करने के लिए सक्षम बनाने में है। उन्होंने कहा कि सरकार की 'मिशन युवा' योजना इसी उद्देश्य से शुरू की गई है, जिसके तहत व्यापक सर्वेक्षण के आधार पर संभावित उद्यमियों की पहचान कर उन्हें आवश्यक संसाधनों से जोड़ा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद जम्मू-कश्मीर ने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है, जो मजबूत संस्थाओं की भूमिका को दर्शाता है।मुख्यमंत्री ने कहा कि दशकों तक आतंकवाद के कारण प्रदेश में "सुरक्षा आधारित अर्थव्यवस्था" विकसित हुई, जहां विस्तार के बजाय सुरक्षा को प्राथमिकता मिली। ऐसे में आर्थिक पुनरुद्धार के लिए लोगों का विश्वास बहाल करना सबसे महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) ने अब तक प्रमुख आर्थिक केंद्रों को अधिक मजबूत किया है। जम्मू-कश्मीर बेंगलुरु जैसी अर्थव्यवस्था नहीं बन सकता, लेकिन भारत की समग्र आर्थिक प्रगति का लाभ अवश्य उठा सकता है।
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