बैतूल , अप्रैल 22 -- मध्य प्रदेश के बैतूल कृषि उपज मंडी में लंबे समय से चली आ रही अव्यवस्थाओं पर प्रशासन की सख्ती का असर अब साफ नजर आने लगा है। नवागत कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे के निर्देशों के बाद मंडी परिसर में वर्षों से जमे व्यापारियों के माल को हटाने की कार्रवाई तेज हुई, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिली है।
मंडी परिसर और शेड में पहले व्यापारियों के बोरों का कब्जा रहने से किसानों को अपनी उपज खुले में उतारनी पड़ती थी। कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम एवं मंडी के भारसाधक अधिकारी डॉ. अभिजीत सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए व्यापारियों को 20 अप्रैल तक माल हटाने का अल्टीमेटम दिया था। समयसीमा का पालन नहीं करने पर लाइसेंस निरस्तीकरण सहित दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।
मंगलवार को इस सख्ती का असर स्पष्ट दिखा। मंडी में करीब 18 हजार 282 बोरे की आवक के बावजूद परिसर पहले की तुलना में काफी खाली नजर आया। लगभग 85 प्रतिशत व्यापारियों ने समय पर अपना माल हटा लिया, जबकि निर्देशों का पालन नहीं करने वाली दो फर्मों को मक्का नीलामी में भाग लेने से रोक दिया गया।
कार्रवाई के विरोध में कुछ व्यापारियों ने थोड़ी देर के लिए नीलामी प्रक्रिया रोक दी और एक दिन की मोहलत मांगी। प्रशासन ने अंतिम अवसर देते हुए बुधवार तक बोरे हटाने की अनुमति दी, लेकिन संबंधित फर्मों ने नीलामी में हिस्सा नहीं लिया।
प्रशासन की सख्ती से मंडी सचिव की कार्यप्रणाली में भी बदलाव देखने को मिला है। अधिकारियों के अनुसार अब नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है।
इस व्यवस्था सुधार से किसानों को सबसे अधिक राहत मिली है। लंबे समय बाद उन्हें मंडी के शेड में मक्का सहित अन्य उपज उतारने के लिए पर्याप्त स्थान मिला, जिससे भीषण गर्मी में खुले में इंतजार करने की समस्या से निजात मिली।
एसडीएम डॉ. अभिजीत सिंह ने बताया कि अधिकांश बोरे हटाए जा चुके हैं, हालांकि अभी भी 10 से 12 हजार बोरे हटाए जाना शेष हैं। संबंधित व्यापारियों को अंतिम चेतावनी दी गई है और समयसीमा में कार्रवाई पूरी नहीं होने पर सख्त कदम उठाए जाएंगे। किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन इसी तरह सख्ती बनाए रखता है तो मंडी व्यवस्था स्थायी रूप से सुधर सकती है।
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