कोलकाता , जून 11 -- कलकत्ता उच्च न्यायालय ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को एक बड़ी राहत देते हुए कथित 'हस्ताक्षर जालसाजी' मामले में अगले 21 दिनों तक किसी भी दंडात्मक कार्रवाई या गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान कर दी है।
न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की एकल-न्यायाधीश अवकाशकालीन पीठ ने साथ में यह साफ कर दिया है कि यह राहत पूरी तरह से इस शर्त पर निर्भर करेगी कि वे राज्य के आपराधिक जांच विभाग (सीआईडी) की जांच में पूरी तरह सहयोग करें।
यह आदेश तब आया जब श्री बनर्जी के वकील अयान भट्टाचार्य ने न्यायालय को आश्वस्त किया कि उनके मुवक्किल गुरुवार शाम 6 बजे ही कोलकाता के भवानी भवन स्थित सीआईडी मुख्यालय में जांचकर्ताओं के सामने पेश होंगे और भविष्य में भी जब भी जरूरत होगी, वे सुबह 10 बजे से रात 10 बजे के बीच एजेंसी के समन का जवाब देंगे।
न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि आज शाम की पूछताछ प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे वहां से जाने के लिए स्वतंत्र होंगे और अब इस मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी, जिसमें सीआईडी को अपनी प्रगति रिपोर्ट सौंपनी होगी।
गौरतलब है कि यह पूरा कानूनी विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नामित करने वाले एक प्रस्ताव पत्र से जुड़ा है, जिसे 20 मई को विधानसभा अध्यक्ष को सौंपा गया था। इस पत्र पर श्री बनर्जी के भी हस्ताक्षर थे, लेकिन टीएमसी के ही दो विधायकों, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने शिकायत दर्ज कराई कि इस दस्तावेज़ पर उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं।
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