कोलकाता , अक्टूबर 14 -- कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल में सात नगर निकाय चुनावों के लिए ईवीएम से जुड़ी बाधा दूर करते हुए राज्य चुनाव आयोग को पिछले चुनावों में इस्तेमाल की गयी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) में संरक्षित पुराने डेटा को तुरंत समाप्त करने के बुधवार को निर्देश दिये।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवींद्र वी. घुगे और न्यायमूर्ति ओम नारायण राय की पीठ ने आयोग को निर्देश दिया कि वह आने वाले चुनावों के लिए मशीनों की उपलब्धता से जुड़े मुद्दे का समाधान करने के लिए उनमें संरक्षित पुराने डेटा को हटा दे।
इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में नगरपालिका चुनाव कराने में आ रही एक बड़ी कानूनी बाधा दूर हो गयी है। चुनाव आयोग ने आज सुनवाई के दौरान न्यायालय को बताया कि वह नवंबर-दिसंबर में नगर निकाय चुनाव कराने के लिए तैयार है।
इससे पहले न्यायालय ने सोमवार को आयोग से ईवीएम और वीवीपैट डेटा संरक्षण की विस्तृत रिपोर्ट मांगी। पीठ ने पूछा था कि क्या मशीनों से इकट्ठा किये गए मतदान डेटा को हार्ड डिस्क में अलग से संरक्षित किया जा सकता है और क्या ऐसी व्यवस्था कानूनी रूप से मान्य है। न्यायालय ने रिपोर्ट पर विचार करने के बाद आज अपना आदेश दिया।
आयोग पहले चरण में सात नगर पालिकाओं कोलकाता, हावड़ा, बाली, हल्दिया, धूपगुड़ी, कलिम्पोंग और कर्सियांग में चुनाव कराने की तैयारी कर रहा है। इन नगर निकायों में कुल 6,301 बूथों पर मतदान होगा और इसके प्रशासनिक तैयारियां पहले ही शुरू हो चुकी हैं। राज्य चुनाव आयोग के पास अभी 21,184 बैलेट यूनिट और 19,564 कंट्रोल यूनिट हैं। राज्य के 12 ज़िलों में कम से कम 15 नगर पालिकाएं अभी बिना चुने हुए नगर बोर्ड के काम कर रही हैं और वहां नगर पालिका की सेवाओं की देखरेख प्रशासक कर रहे हैं। हावड़ा का मामला काफ़ी अलग है क्योंकि वहां 13 सालों से नगरपालिका चुनाव नहीं हुए हैं। हावड़ा नगर निगम में पिछला चुनाव 2013 में हुआ था। इसके चुने हुए बोर्ड का कार्यकाल 2018 में खत्म हो गया जिसके बाद से यह नगर निकाय बिना चुने हुए बोर्ड के ही काम कर रही है।
पश्चिम बंगाल में नयी राज्य सरकार के गठन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने लंबित नगरपालिका चुनाव जल्द से जल्द कराने की आवश्यकता पर बल दिया है।
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