कोलकाता , दिसंबर 05 -- कलकत्ता उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को उन जनहित याचिकाओं में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिनमें पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिले मुर्शिदाबाद में 6 दिसंबर को बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक मस्जिद के निर्माण के लिए तृणमूल कांग्रेस के निष्कासित विधायक हुमायूं कबीर के प्रस्तावित शिलान्यास समारोह पर रोक लगाने की मांग की गयी थी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश सुजय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थ सारथी सेन की कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में हस्तक्षेप करने की कोई आवश्यकता नहीं है और राय दी कि राज्य प्रशासन और पुलिस को कानून और व्यवस्था को बनाये रखना सुनिश्चित करना होगा।
याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता बिकाश रंजन भट्टाचार्य ने अयोध्या की विवादित बाबरी मस्जिद, जिसे 6 दिसंबर 1992 को भीड़ ने ढहा दिया था, की प्रतिकृति वाली मस्जिद का निर्माण करने की श्री कबीर की योजना से जिले में सांप्रदायिक तनाव पैदा होने की आशंका के मद्देनजर स्थगन आदेश की मांग की थी।
इसमें कहा गया है कि मस्जिद का नाम "बाबरी मस्जिद" रखना और बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी 6 दिसंबर के दिन ही कार्यक्रम आयोजित करना "जानबूझकर उठाया गया और भड़काने वाला कदम" लगता है। वरिष्ठ ज़िला अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और राज्य प्रशासन को इस संबंध में कई शिकायतें और ज्ञापन दिए गये।
श्री कबीर ने अपनी प्रस्तावित योजना के बारे में कलकत्ता उच्च न्यायालय की टिप्पणी का स्वागत किया और कहा कि न्यायाधीशों ने सही काम किया है तथा कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के लिए राज्य और पुलिस प्रशासन पर भरोसा जताया है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित