कोलकाता , जुलाई 18 -- कलकत्ता उच्च न्यायालय 63 करोड़ रुपये के ड्रग्स मामले में एक गर्भवती आरोपी को मानवीय आधार पर अंतरिम ज़मानत दे दी है।
न्यायाधीश तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने आदेश देते हुए कहा कि सिर्फ़ गर्भावस्था ज़मानत का आधार नहीं हो सकती, खासकर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) कानून जैसे कड़े कानून के तहत। भारी मात्रा में ड्रग्स से जुड़े मामलों में एनडीपीएस कानून की धारा 37 (जिसके तहत सभी अपराध संज्ञेय और गैर-ज़मानती माने जाते हैं) के तहत लगी पाबंदियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता, लेकिन न्यायालय ने कहा कि उचित मामलों में गर्भवती कैदी की सेहत, अजन्मे बच्चे की सुरक्षा और मानवीय गरिमा को ध्यान में रखते हुए अंतरिम राहत दी जा सकती है। न्यायालय ने आरोपी को 21 सितंबर तक अंतरिम ज़मानत दे दी।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के अनुसार, तीन अप्रैल को कोलकाता में तीन जगहों पर छापेमारी की गई थी। एनसीबी ने बताया कि उसने एमडीएमए कोकीन, एलएसडी, एम्फेटामाइन, गांजा और ट्रामाडोल जैसी बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित ड्रग्स ज़ब्त कीं। साथ ही 4.35 लाख नकद भी बरामद किए गये।
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