भोपाल , फरवरी 17 -- मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्रीय करों के बंटवारे की नई नीति से राज्य को होने वाले संभावित आर्थिक नुकसान पर चिंता जताई है। उन्होंने प्रदेश की वित्तीय स्थिति को गंभीर बताते हुए केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की है।श्री पटवारी ने पत्र में उल्लेख किया कि 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार केंद्रीय करों में मध्यप्रदेश की हिस्सेदारी 7.85 प्रतिशत से घटाकर 7.35 प्रतिशत कर दी गई है। इस 0.50 प्रतिशत की कटौती से वर्ष 2026 से 2031 के बीच राज्य को लगभग 50 हजार करोड़ रुपये के संभावित राजस्व नुकसान का अनुमान है।
उन्होंने कहा कि यह कटौती विकास योजनाओं, अधोसंरचना परियोजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है, विशेषकर उस समय जब राज्य की वित्तीय स्थिति पहले से दबाव में है।
पत्र में बताया गया कि राज्य पर कुल सार्वजनिक ऋण लगभग 5.31 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जो वार्षिक बजट से अधिक है। केवल फरवरी माह में ही राज्य सरकार द्वारा तीन बार 5 हजार करोड़ रुपये से अधिक की उधारी ली गई है और चालू वित्तीय वर्ष में कुल उधारी लगभग 72,900 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
श्री पटवारी ने यह भी कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में स्वीकृत बजटीय प्रावधानों का पूर्ण उपयोग नहीं हो सका। अधोसंरचना एवं विकास से संबंधित लगभग 1000 करोड़ रुपये के प्रावधानों में से करीब 70 प्रतिशत राशि व्यय नहीं हो पाई, जबकि राज्य समानांतर रूप से उधारी पर निर्भर रहा। उन्होंने इसे वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक दक्षता की कमी बताया।
उन्होंने उल्लेख किया कि 18 फरवरी को राज्य का वार्षिक बजट प्रस्तुत किया जाना है और ऐसे समय में कर-वितरण के नए फार्मूले से संभावित राजस्व हानि की सूचना ने चिंताएं बढ़ा दी हैं।
श्री पटवारी ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि राजनीति से ऊपर उठकर मध्यप्रदेश की वित्तीय स्थिति की निगरानी सुनिश्चित की जाए तथा ऋण प्रबंधन और राजकोषीय अनुशासन को सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया जाए। साथ ही उन्होंने मध्य प्रदेश कांग्रेस विधायक दल के प्रतिनिधिमंडल को समय देने का अनुरोध किया, ताकि कर-वितरण के पुनर्विचार और वित्तीय संतुलन पर रचनात्मक संवाद हो सके।
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