बेंगलुरु , अक्टूबर 01 -- कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को निर्देश दिया है कि वे कानून के अनुसार उन आवेदकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करें, जिन्होंने मतदाता-पंजीकरण फॉर्म में जानबूझकर गलत बयान या घोषणाएं की हैं। यह निर्देश 'विशेष गहन पुनरीक्षण' के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए 'फॉर्म 7' आवेदनों के बड़े पैमाने पर जमा करने के आरोपों को लेकर बढ़ते विवाद के बीच दिया गया है।

गुरुवार को जारी एक अहम निर्देश में, सीईओ कार्यालय ने कहा कि उनके ध्यान में यह बात आई है कि ईआरओ के पास फॉर्म 7 में बड़ी संख्या में आवेदन' जमा किए जा रहे हैं और यह आरोप लगाया गया है कि ये फॉर्म असली नहीं हैं।

इस आदेश में फ़ॉर्म 6, फ़ॉर्म 6ए, फ़ॉर्म 7 और फ़ॉर्म 8 शामिल हैं और इसमें 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' की धारा 31 लागू की गई है। यह धारा ऐसे व्यक्ति के ख़िलाफ़ कार्रवाई का प्रावधान करती है जो चुनावी पंजीकरण में जान-बूझकर लिखित रूप में कोई झूठा बयान या घोषणा करता है।

हालांकि, सीईओ के ऑफ़िस ने स्पष्ट किया है कि कानून के तहत कार्रवाई करने से पहले मतदाताओं के पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 20 के तहत जांच होनी चाहिए। यह निर्देश ज़िला चुनाव अधिकारियों और उपायुक्तों, बीबीएमपी चुनाव ज़िलों के अतिरिक्त ज़िला चुनाव अधिकारियों, बेंगलुरु नगर निगम आयुक्तों, बेंगलुरु शहर के अतिरिक्त ज़िला चुनाव अधिकारी और उपायुक्त, और सभी 224 विधानसभा क्षेत्रों के ईआरओ को भेजा गया।

एसआईआर प्रक्रिया के दौरान 'फॉर्म 7' के कथित दुरुपयोग को लेकर बढ़ते आरोपों के बीच यह आदेश अहम है। फॉर्म 7 वह तय तरीका है जिससे कोई वोटर मतदाता सूची में नाम शामिल करने पर आपत्ति दर्ज कर सकता है या खास वजहों से नाम हटवाने की मांग कर सकता है। सीईओ के निर्देश का यह मतलब नहीं है कि जिन बड़ी संख्या में आए आवेदनों का ज़िक्र किया गया है, वे सभी झूठे थे; बल्कि, इसमें संबंधित ईआरओ से कहा गया है कि वे उन मामलों की जांच करें जहां जान-बूझकर झूठी जानकारी देने के आरोप या संकेत हों, और जहां ऐसे उल्लंघन साबित हों, वहां कार्रवाई की जाए।

यह निर्देश तब आया जब बेंगलुरु में मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय के बाहर मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की अगुवाई में विरोध प्रदर्शन हुआ। उन्होंने आरोप लगाया था कि बड़ी संख्या में 'फॉर्म 7' आवेदनों के ज़रिए योग्य मतदाताओं के नाम हटाने की सुनियोजित कोशिश की गई है और उन्होंने इसके लिए प्राथमिकी दर्ज करने और तय समय-सीमा में जांच कराने की मांग की।

श्री शिवकुमार और कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि अल्पसंख्यक समुदायों, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा था।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने आज अलग से आरोप लगाया कि बेलगावी में 22, 23 और 24 सितंबर को बड़ी संख्या में 'फॉर्म 7' आवेदन जमा करके मतदाता सूची से लगभग 15,000 मतदाताओं के नाम हटाने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज करने और कार्रवाई करने की मांग की।

श्री गांधी ने आरोप लगाया कि मुसलमान, एससी, एसटी और ओबीसी उन लोगों में शामिल थे जिन्हें निशाना बनाया गया और इस बात पर सवाल उठाया कि कथित रूप से आवेदन किस तरह तैयार किए गए और जमा किए गए। ये राजनीतिक आरोप हैं जो एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चल रहे व्यापक विवाद के बीच लगाए गए हैं और सीईओ के एक अक्टूबर के निर्देश से इनकी पुष्टि नहीं हुई है।

उल्लेखनीय है कि 198 वोटरों के नाम हटवाने की कथित कोशिश को लेकर 30 सितंबर को बेलगावी में भाजपा नेता डॉ. रवि पाटिल और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने से इस विवाद ने एक नया कानूनी रूप ले लिया है।

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