बेंगलुरु , जून 05 -- कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.एच. मुनियप्पा मंत्रिपरिषद के गठन और विभागों के बंटवारे को लेकर पार्टी में चल रही अंदरूनी नाराज़गी का अगला केंद्र बन सकते हैं। यह घटनाक्रम डी.के. शिवकुमार के मुख्यमंत्री का पद संभालने के कुछ ही दिनों बाद हुआ है।

ये अटकलें वरिष्ठ मंत्री आर. रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफ़े के बाद शुरू हुई हैं। श्री रेड्डी ने उन्हें सौंपे गए विभाग को लेकर अपमान महसूस करते हुए मंत्रिपरिषद से इस्तीफ़ा दे दिया था, जिससे नई सरकार के भीतर की दरारें उजागर हो गईं। श्री मुनियप्पा ने सार्वजनिक रूप से कोई असंतोष ज़ाहिर नहीं किया है और न ही इस्तीफ़े का कोई संकेत दिया है, लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि कुछ वरिष्ठ नेता इस बात से नाराज़ हैं कि नयी व्यवस्था के तहत मंत्रिपरिषद में जगह और विभागों का बंटवारा किस तरह किया गया है।

इन घटनाक्रमों ने कांग्रेस नेतृत्व को 'नुकसान भरपाई' की स्थिति में ला दिया है। पार्टी नेतृत्व यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि श्री रेड्डी के इस्तीफ़े से पार्टी के प्रभावशाली नेताओं और क्षेत्रीय शक्ति केंद्रों के बीच कोई बड़ा विरोध न भड़क उठे। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पार्टी आलाकमान स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है और वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि शिकायतों के कारण सरकार के लिए कोई बड़ा संकट न खड़ा हो जाए।

श्री सिद्धारमैया से श्री शिवकुमार को सत्ता का हस्तांतरण इसलिए किया गया था ताकि नेतृत्व को लेकर महीनों से चल रही अंदरूनी खींचतान पर विराम लग सके। हालांकि, मंत्रिपरिषद गठन को लेकर हुए विवाद ने ध्यान को प्रतिनिधित्व और प्रभावशाली विभागों की होड़ की ओर मोड़ दिया है।

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