बेंगलुरु , मार्च 05 -- कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के उपनेता अरविंद बेलाड ने सिद्दारमैया सरकार पर दलितों से धोखा करने का आरोप लगाया।

श्री बेलाड ने गुरुवार को संवाददाताओं से कहा कि अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए निर्धारित धन का इस्तेमाल सरकार अपनी गारंटी योजनाओं के वित्तपोषण करने के लिए कर रही है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार ने पिछले तीन वर्षों में दलित कल्याण के लिए धन का उपयोग करने के बजाय गारंटी कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के लिए एससीपी/टीएसपी फंड से 38,859 करोड़ रुपये का इस्तेमाल किया है।

उन्होंने बताया कि गारंटी योजनाओं के लिए वर्ष 2023-24 में 11,144 करोड़ रुपये, 2024-25 में 14,282 करोड़ रुपये और 2025-26 में 13,433 करोड़ रुपये खर्च किये गये।

भाजपा नेता ने मांग की कि राज्य सरकार आगामी राज्य बजट में दलितों के लिए निर्धारित फंड से ली गयी राशि वापस करे और उनके कल्याण के लिए नया आवंटन भी करे। उन्होंने सरकार से बजट में एससी/एसटी निगमों को कम से कम 1,000 करोड़ रुपये आवंटित करने का भी आग्रह किया।

श्री बेलाड ने फंड का भविष्य में होने वाले दुरुपयोग को रोकने के लिए धारा 7सी को हटाने की मांग की और सरकार से यह आश्वासन मांगा कि दलितों के लिए निर्धारित फंड का इस्तेमाल गारंटी योजनाओं में नहीं किया जायेगा।

उन्होंने कहा कि नियम विभागों को दलित आबादी के अनुपात में धन खर्च करने और पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी पहलों के जरिये दलितों और आदिवासियों के सशक्तीकरण को प्राथमिकता देने का आदेश देते हैं, जबकि सरकार ने इसके बजाय इन निधियों का उपयोग अपनी गारंटियों के लिए किया है।

श्री बेलाड ने कहा कि विशेष रूप से दलितों के लिए निर्धारित धन का उपयोग उच्च जातियों और अल्पसंख्यकों सहित अन्य समुदायों के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस के भीतर मौजूद दलित विधायकों की भी आलोचना की और कहा कि दूसरे मदों में धन के इस्तेमाल और दलित समूहों के विरोध प्रदर्शनों के बावजूद वे चुप रहे।

सरकारी नियुक्तियों का जिक्र करते हुए श्री बेलाड ने कहा कि धारवाड़ में नौकरियों की मांग को लेकर युवाओं के प्रदर्शन के बाद सरकार ने 56,000 पदों पर भर्ती की घोषणा की थी, लेकिन इस पर कोई स्पष्टता नहीं दी कि अधिसूचना कब जारी होगी या भर्ती प्रक्रिया कैसे संचालित की जायेगी।

उन्होंने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) की परीक्षा में अनियमितताओं का भी आरोप लगाया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उनके अनुसार, एक परीक्षा हॉल से 15 उम्मीदवारों का चयन हुआ और एक ही परिवार के तीन सदस्यों ने परीक्षा पास की, जो भ्रष्टाचार का संकेत है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित