बेंगलुरु , मार्च 06 -- कर्नाटक सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिये सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा है।

उल्लेखनीय है कि अगर यह कदम लागू होता है, तो यह भारत में अपनी तरह का पहला प्रतिबंध होगा। इस प्रस्ताव की घोषणा मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने 2026-27 का राज्य बजट पेश करते समय की , जिसमें प्रौद्योगिकी से होने वाले विकास और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने पर ध्यान दिया गया है। इस नीति का मकसद स्कूल जाने वाले बच्चों में डिजिटल लत, ऑनलाइन उत्पीड़न (साइबरबुलिंग) और आउटडोर तथा पढ़ाई में कम होते जुड़ाव को लेकर बढ़ती चिंताओं को दूर करना है।

इस पहल का बेंगलुरु जैसे शहरी इलाकों में बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है, जहां छात्रों के बीच इंटरनेट और स्मार्टफोन की अधिक पहुंच ने शिक्षकों और बाल विकास विशेषज्ञों के बीच चिंता बढ़ा दी है।

राज्य अधिकारियों ने कहा कि प्रस्ताव को लागू करने के लिये प्रौद्योगिकी कंपनियों, शैक्षिक संस्थानों और अनुसंधान संगठनों से सहयोग की जरूरत होगी ताकि इसे लागू करने के असरदार तरीके विकसित किए जा सकें। सरकार ने नयी प्रौद्योगिकी निवेश की भी घोषणा की, जिसमें भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन और दूसरी वैज्ञानिक एजेंसियों के साथ मिलकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और रोबोटिक्स नवाचार क्षेत्र बनाने की योजना शामिल है।

जानकारों का मानना है कि यह कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म तक नाबालिगों की पहुंच को विनियमित करने के वैश्विक ट्रेंड के मुताबिक है। जहां बाल कल्याण समूह ने इस प्रस्ताव का एक सुरक्षात्मक उपाय के तौर पर स्वागत किया है, वहीं डिजिटल विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि उन्नत आयु सत्यापन प्रणाली और डिजिटल प्लेटफॉर्मों के विनियमन के बिना इसे लागू करना मुश्किल हो सकता है।

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