बेंगलुरु , सितंबर 22 -- कर्नाटक विधान परिषद में मंगलवार को राज्य में गहराते सूखे के हालात, सूखा प्रबंधन, पीने के पानी की किल्लत, किसानों के नुकसान और केंद्र सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता के मुद्दों पर सत्ताधारी कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों ने एक-दूसरे पर जम कर आरोप-प्रत्यारोप लगाए।
राज्य सरकार ने सदन को सूचित किया कि वह केंद्र सरकार से सूखे से निपटने के लिए 18,000 करोड़ रुपये की राहत राशि मांगने की तैयारी कर रही है। दूसरी ओर, विपक्ष ने आरोप लगाया कि कम बारिश और पानी की कमी की समय से पहले चेतावनी मिलने के बावजूद सरकार समय रहते उचित कदम उठाने में पूरी तरह विफल रही है।
उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने बताया कि राज्य के 123 तालुक पहले ही सूखाग्रस्त घोषित हो चुके हैं और 53 अन्य तालुकों को भी इस सूची में शामिल किया जा रहा है। इससे सूखा प्रभावित तालुकों की संख्या बढ़कर लगभग 210 हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार शुरुआत में 101 सूखाग्रस्त तालुकों के लिए केंद्र से 18,000 करोड़ रुपये की सहायता मांगेगी और इसके बाद एक अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। वित्तीय मदद की गुहार लगाने के लिए केंद्र के पास एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल भी ले जाया जाएगा।
विपक्ष के नेता छलावादी नारायणस्वामी ने सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि शुरुआती चेतावनियों के बावजूद कोई निवारक कदम नहीं उठाए गए। भाजपा नेता ने बेंगलुरु सहित कई जिलों में गहराते पेयजल संकट का मुद्दा उठाया और चेतावनी दी कि अंधाधुंध बोरवेल खुदाई से भूजल स्तर पर भारी दबाव पड़ रहा है। उन्होंने कहा, "कोलार, चिक्कबल्लापुर और तुमकुरु में 2,000 फीट से अधिक गहराई तक बोरवेल खोदे जा चुके हैं, फिर भी पानी नहीं मिल रहा है।" उन्होंने यह भी दावा किया कि अपर्याप्त बारिश के कारण फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं।
श्री नारायणस्वामी ने प्रभावित किसानों को पहले अपने स्तर पर पर्याप्त राहत राशि दिए बिना ही क्षेत्रों को सूखाग्रस्त घोषित करने और केंद्र पर निर्भर रहने की सरकार की नीति पर सवाल उठाए।
बहस ने उस समय राजनीतिक मोड़ ले लिया जब भाजपा सदस्य रवि कुमार ने मनमोहन सिंह सरकार के दौरान घोषित 72,000 करोड़ रुपये की कृषि ऋण माफी का जिक्र किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के खातों में 14.50 लाख करोड़ रुपये स्थानांतरित किए हैं। कांग्रेस सदस्यों ने इस दावे पर कड़ा ऐतराज जताया, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई।
सदन में बढ़ते हंगामे को देखते हुए विधान परिषद के सभापति सलीम अहमद ने हस्तक्षेप किया और सदस्यों से गरिमा बनाए रखने की अपील की। हंगामे के बीच उन्होंने सवाल किया, "यह किस तरह का मछली बाजार बना दिया गया है?" उन्होंने सदस्यों से एक-दूसरे के प्रति असम्मानजनक व्यवहार न करने का अनुरोध करते हुए कहा, "जनता हमें देख रही है," और दोनों पक्षों से बहस आगे बढ़ने देने की अपील की।
इसके बावजूद गतिरोध बना रहा और सत्ता पक्ष के सदस्यों ने लगातार की जा रही नारेबाजी और रुकावटों पर विरोध जताया। हंगामे और नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई और सभापति ने बैठक को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया।
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