बेंगलुरु , जून 23 -- कर्नाटक में विपक्ष के नेता आर. अशोक के इस बयान ने कि राज्य विधान परिषद चुनावों (एमएलसी) में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो-तीन विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग की थी, पार्टी की राज्य यूनिट में राजनीतिक हलचल मचा दिया है।

श्री अशोक ने संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि पार्टी को साफ संकेत मिले हैं कि विधान परिषद चुनावों में भाजपा विधायकों के एक छोटे से समूह ने पार्टी लाइन के खिलाफ वोट किया था। उन्होंने इस मामले को अनुशासन का गंभीर उल्लंघन बताया और चेतावनी दी कि अंदरूनी समीक्षा पूरा होने के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी।

श्री अशोक ने कहा, "हमारे पास जानकारी है कि भाजपा के दो-तीन विधायकों ने क्रॉस-वोटिंग की है। पार्टी सख्त कार्रवाई करेगी।" श्री अशोक ने मामले को संगठनात्मक स्तर पर भी उठाने की बात कही है। उनके बयान ने पार्टी हलकों में परिषद चुनावों के दौरान अलग-अलग वोट व्यवहार के बारे में शक को सही साबित कर दिया है, जिन पर अक्सर विधायकों के बीच पार्टी की एकजुटता और वफादारी के संकेतों के लिए बारीकी से नजर रखी जाती है।

कर्नाटक में भाजपा नेतृत्व से अब उम्मीद की जा रही है कि वह इसमें शामिल विधायकों की पहचान करने और क्रॉस-वोटिंग के पीछे के हालात को समझने के लिए एक विस्तृत आंतरिक मूल्यांकन शुरू करेगी। वरिष्ठ नेता मामले को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए केंद्रीय नेतृत्व के पास भी ले जा सकते हैं।

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि श्री अशोक का इस मुद्दे को सार्वजनिक रूप से मानना अंदरूनी अनुशासनहीनता पर नियंत्रण करने की कोशिश और पार्टी रैंकों में और फूट को रोकने की चेतावनी दोनों का इशारा है। गौरतलब है कि इस घटना ने कर्नाटक में चल रहे राजनीतिक मंथन को और तेज कर दिया है, जहां सत्ताधारी और विपक्षी दोनों पार्टियां आने वाली चुनावी चुनौती से पहले अंदरूनी एकता का करीब से प्रबंधन कर रही हैं।

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