बेंगलुरु , जुलाई 05 -- कर्नाटक वन विभाग ने पूर्व राज्य मंत्री गली जनार्दन रेड्डी से जुड़ी ओबुलापुरम माइनिंग कंपनी (ओएमसी) के कथित अवैध खनन कार्यों से हुए नुकसान का आकलन करते हुए इसे लगभग 1.17 लाख करोड़ रुपये आंका है और इसकी वसूली की मांग की है।

राज्य सरकार को सौंपी गई वन विभाग की मूल्यांकन रिपोर्ट में कथित तौर पर यह निष्कर्ष निकाला गया है कि बल्लारी में संरक्षित वन भूमि से बड़े पैमाने पर लौह अयस्क के अवैध निकासी से राज्य को भारी वित्तीय नुकसान होने के साथ-साथ व्यापक पर्यावरणीय क्षति भी हुई है। रिपोर्ट में कथित तौर पर सिफारिश की गई है कि सरकार कानून के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत ओएमसी से इस राशि को वसूलने की कार्यवाही शुरू करे।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब तेलंगाना उच्च न्यायालय ने रविवार को श्री रेड्डी और तीन अन्य वी.डी. राजगोपाल, बी.वी. श्रीनिवास रेड्डी और के. महफूज अली खान को सशर्त जमानत दे दी। साथ ही अदालत ने हैदराबाद की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष अदालत द्वारा पिछले महीने ओएमसी अवैध खनन मामले में उन्हें सुनाई गई सात साल की जेल की सजा को भी निलंबित कर दिया।

उच्च न्यायालय ने आरोपियों को निर्देश दिया कि वे देश न छोड़ें, प्रत्येक 10 लाख रुपये का निजी मुचलका भरें और उनकी अपील लंबित रहने के दौरान न्यायिक प्रक्रिया में किसी भी तरह का हस्तक्षेप न करें।

विशेष सीबीआई अदालत ने ओएमसी से जुड़े लंबे समय से चल रहे अवैध खनन मामले में इन चारों को दोषी ठहराया था, जो कर्नाटक-आंध्र प्रदेश सीमा पर लौह अयस्क के कथित अवैध निष्कर्षण और खनन उल्लंघनों से संबंधित है।

कर्नाटक उच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद तैयार की गई वन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, अनुमानित नुकसान की गणना अवैध रूप से निकाले गए अयस्क की मात्रा, उसके वाणिज्यिक मूल्य और वन भूमि को हुए पर्यावरणीय नुकसान के आधार पर की गयी है।

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