बेंगलुरु , जुलाई 23 -- कर्नाटक लोक सेवा आयोग (केपीएससी) के पूर्व अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहूकार के निलंबन के कुछ ही दिनों बाद आयोग एक बार फिर विवादों में घिर गया है।
पचास से अधिक अभ्यर्थियों ने 400 पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि मध्यस्थों के जरिए सरकारी नौकरियां 80 लाख रुपये तक में बेची जा रही हैं।
अभ्यर्थियों ने गुरुवार को विधान सौध थाने पहुंचकर प्राथमिकी दर्ज करने और इस 'दागी' भर्ती प्रक्रिया की विस्तृत जांच की मांग की। उन्होंने मांग की है कि यदि ये आरोप सही पाये जाते हैं तो पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द कर नये सिरे से पारदर्शी तरीके से परीक्षा आयोजित करायी जाये।
यह नया विवाद इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में केपीएससी के पूर्व अध्यक्ष शिवशंकरप्पा साहूकार को पद के दुरुपयोग के आरोपों में निलंबित किया गया था। अभ्यर्थियों ने अधिकारियों से आग्रह किया है कि वे इस बात की भी जांच करें कि क्या मौजूदा भर्ती प्रक्रिया में भी गड़बड़ी की गयी थी।
उल्लेखनीय है कि 400 पदों के लिए यह भर्ती परीक्षा आठ जनवरी को आयोजित की गयी थी, जिसके नतीजे 17 जुलाई को घोषित किये गये। परिणाम आते ही कई अभ्यर्थियों ने प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाये। उनका आरोप है कि योग्य उम्मीदवारों को नजरअंदाज किया गया और चयन प्रक्रिया में भारी हेरफेर हुई है। सबसे गंभीर आरोपों में यह दावा शामिल है कि मध्यस्थों के जरिए 80 लाख रुपये में नौकरी देने का सौदा किया जा रहा था। अभ्यर्थियों ने अपनी शिकायत के साथ एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी पुलिस को सौंपी है। दावा किया गया है कि इस रिकॉर्डिंग में एक एजेंट और अभ्यर्थी के परिवार के बीच बातचीत दर्ज है, जिसमें एजेंट 80 लाख रुपये नकद बेंगलुरु लाने और सुरक्षा के तौर पर चेक देने की बात कह रहा है।
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