बेंगलुरु , सितंबर 25 -- कर्नाटक में अरसे से टल रहे ग्रामीण स्थानीय निकाय चुनावों की उल्टी गिनती शुरू हो गयी है तथा राज्य चुनाव आयोग ने ग्राम, तालुका और जिला पंचायतों के चुनाव के लिए मतदान केंद्रों और मतपेटियों समेत सभी जरूरी संसाधनों का विस्तृत आकलन शुरू कर दिया है।

आगामी 29 सितंबर को बेलगावी और कलबुर्गी मंडलों के अपर उपायुक्तों तथा तहसीलदारों के साथ एक महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंस तय की गयी है। अधिकारियों को मतदान केंद्रों का सत्यापन करने, मतपेटियों का जिला-वार विवरण प्रस्तुत करने और अगर अतिरिक्त मतपेटियों की आवश्यकता हो तो उसका आकलन करने के निर्देश दिये गये हैं। मौजूदा मतपेटियों की स्थिति की भी समीक्षा की जायेगी और अधिकारियों से मरम्मत की आवश्यकता ली पेटियों की पहचान कर जरूरी कार्रवाई शुरू करने को कहा गया है। यह तैयारियां बेहद महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि जिला और तालुका पंचायतों के चुनाव पिछले कई वर्षों से लंबित हैं, जबकि दिसंबर 2020 में चुनी गयी अधिकतर ग्राम पंचायतों का पांच वर्ष का कार्यकाल भी समाप्त हो चुका है।

रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में लगभग 5,950 ग्राम पंचायतें हैं। सरकार ने स्थानीय निकाय चुनाव कराने के लिए आवश्यक आरक्षण और वार्ड परिसीमन का काम पूरा कर लिया है। प्रशासनिक स्तर पर चुनावी उपकरणों और मतदान केंद्रों की समीक्षा का काम आगे बढ़ने के साथ ही अब सभी की निगाहें इस बात पर टिक गयी हैं कि राज्य चुनाव आयोग औपचारिक रूप से चुनावी प्रक्रिया की घोषणा कब करेगा।

आयोग के अक्टूबर में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करने की उम्मीद है, जबकि मतदान संभवतः दिसंबर में कराया जा सकता है। सटीक तारीखों का फैसला और अधिसूचना हालांकि राज्य चुनाव आयोग ही जारी करेगा।

आगामी चुनाव सत्तारूढ़ कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति में भी मुख्य रूप से शामिल हो गये हैं। कांग्रेस विधायक दल की हालिया बैठक में विधायकों को स्थानीय निकाय चुनावों से पहले अपने-अपने क्षेत्रों में सांगठनिक काम तेज करने और विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया गया था।

रिपाेर्टों के अनुसार सरकार ने ग्रामीण सड़कों के विकास के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत को एक करोड़ रुपये देने पर भी चर्चा की है।

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