बेंगलुरु , जून 30 -- कर्नाटक में चुनाव आयोग ने मंगलवार से 5.54 करोड़ से अधिक मतदाताओं के लिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया शुरू कर दी।
इस बीच कांग्रेस सरकार ने इस प्रक्रिया की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था से मतदाता सूची से बड़ी संख्या में मतदाता बाहर हो सकते हैं।
राज्यभर में 59,000 से अधिक बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) ने घर-घर जाकर सत्यापन अभियान शुरू किया। मुख्य चुनाव अधिकारी वी. अंबु कुमार ने बेंगलुरु में स्वयं अपना गणना प्रपत्र भरकर इस अभियान का शुभारंभ किया और सभी पात्र मतदाताओं से इसमें भाग लेने की अपील की।
कर्नाटक उन 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल है, जहां चुनाव आयोग विशेष गहन पुनरीक्षण करा रहा है। इसके लिए एक अक्टूबर, 2026 को अर्हता तिथि निर्धारित की गयी है।
घर-घर जाकर गणना का यह अभियान 30 जून से 29 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान बीएलओ 16 जून, 2026 को प्रकाशित मतदाता सूची में शामिल सभी मतदाताओं को गणना प्रपत्र वितरित करेंगे। राज्य में पंजीकृत मतदाताओं की कुल संख्या 5,54,32,314 है और सभी को इस प्रक्रिया के दायरे में शामिल किया जायेगा।
यह पुनरीक्षण 31 जिला निर्वाचन अधिकारियों, चार अतिरिक्त जिला निर्वाचन अधिकारियों, 224 निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों, 336 सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों, 7,556 बीएलओ पर्यवेक्षकों और 59,050 बूथ स्तरीय अधिकारियों के माध्यम से कराया जा रहा है। इसके अलावा मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त 1,15,112 बूथ स्तरीय एजेंट भी इस प्रक्रिया में तैनात किये गये हैं।
सत्यापन प्रक्रिया की निगरानी के लिए बीएलओ प्रत्येक घर पर रंगीन स्टीकर लगाएंगे। बैंगनी रंग का स्टीकर गणना प्रपत्र वितरित किए जाने का संकेत देगा, जबकि लाल स्टीकर बंद मिले घरों पर लगाया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर बीएलओ पूर्ण रूप से भरे हुए प्रपत्र एकत्र करने के लिए तीन बार तक संबंधित घर का दौरा करेंगे।
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार प्रारूप मतदाता सूची पांच अगस्त को प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद चार सितंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर रहेगा। अंतिम मतदाता सूची सात अक्टूबर को प्रकाशित होगी।
इस बीच, कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने कहा कि राज्य मंत्रिमंडल मतदाता सूची के पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित पुनरीक्षण का समर्थन करता है, लेकिन मौजूदा एसआईआर व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी, मनमानेपन और बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आशंका है।
उन्होंने चुनाव आयोग से पुनरीक्षण प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा कराने, गणना प्रपत्र जमा करने की समय-सीमा बढ़ाकर तीन महीने करने, सत्यापन मानदंडों और उपयोग किए जा रहे सॉफ्टवेयर से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने तथा किसी भी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे नोटिस देने, क्षेत्रीय सत्यापन कराने और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने की मांग की।
श्री खरगे ने महिलाओं, प्रवासी श्रमिकों, झुग्गी बस्तियों के निवासियों, घुमंतू एवं विमुक्त जनजातियों, विधवाओं, दिव्यांगों, अनाथों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों जैसे संवेदनशील वर्गों के लिए विशेष सुरक्षा उपायों की भी मांग की।
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