बेंगलुरु , मई 06 -- कर्नाटक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक बी एस हरीश पर गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।
बेंगलुरु में चुने हुए प्रतिनिधियों के लिए बनी एक विशेष अदालत ने 2023 के जातिगत दुर्व्यवहार के एक मामले में उनके खिलाफ वारंट जारी किया है। अदालत ने यह वारंट बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद उनके पेश न होने के कारण जारी किया है।
विशेष न्यायाधीश संतोष गजानन भट ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वह भाजपा के इस वरिष्ठ नेता को हिरासत में लेकर सात मई को अदालत के सामने पेश करें। इस निर्देश से विधायक पर कानूनी दबाव और बढ़ गया है।
यह मामला 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद सफाई कर्मचारियों के साथ बातचीत के दौरान हरीश द्वारा कथित तौर पर दलित समुदाय के सदस्यों के खिलाफ की गयी अपमानजनक टिप्पणियों से जुड़ा है।
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के नेता डी. हनुमंतप्पा द्वारा हरिहर टाउन थाने में दर्ज करायी गयी शिकायत के अनुसार, हरीश ने कथित तौर पर नगर निगम के कर्मचारियों से कहा कि आंतरिक आरक्षण का लाभ मिलने के बावजूद उन्होंने उनकी पार्टी का समर्थन नहीं किया और वे 'अहसानफरामोश' हैं।
इन टिप्पणियों से समुदाय के कुछ वर्गों में भारी रोष फैल गया, जिसके चलते जाति-आधारित अपमान और अत्याचार से संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी। उसी दिन बाद में हालांकि समुदाय के नेताओं के साथ हुई एक सुलह बैठक के दौरान हरीश ने कथित तौर पर माफ़ी मांग ली थी, लेकिन शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि भाजपा विधायक ने बाद में अपनी विवादित टिप्पणियों का बचाव किया और उन्हें सही ठहराया, जिसके कारण आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की गयी। विधायक के बार-बार अदालत में पेश न होने के कारण, विशेष अदालत ने आखिरकार उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया।
यह घटनाक्रम एक मौजूदा भाजपा विधायक से जुड़े इस राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है। यह घटना ऐसे समय में सामने आयी है, जब भाजपा कर्नाटक की कांग्रेस सरकार को शासन-प्रशासन और कानून-व्यवस्था के मुद्दों पर आक्रामक तरीके से घेर रही है, जबकि दूसरी ओर उसी की पार्टी का एक विधायक खुद ही बढ़ती कानूनी मुश्किलों का सामना कर रहा है।
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