बेंगलुरु , मार्च 06 -- कर्नाटक सरकार ने 2026-27 के लिए राज्य के बजट में अल्पसंख्यक समुदायों के लिए शिक्षा, कौशल विकास और सामाजिक सशक्तिकरण से जुड़ी कई योजनाओं की घोषणा की है।

सरकार के प्रस्ताव के अनुसार 117 मौलाना आज़ाद मॉडल स्कूल और उर्दू स्कूलों को 600 करोड़ की लागत से कर्नाटक पब्लिक स्कूल में अपग्रेड किया जाएगा। इसके अलावा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए 100 अन्य अल्पसंख्यक स्कूलों को भी 400 करोड़ के आवंटन के साथ उन्नत किया जाएगा।

राज्य सरकार ने शिशुनाल शरीफ के नाम पर 10 नए "संत शिशुनाल शरीफ रेजिडेंशियल स्कूल" स्थापित करने की भी घोषणा की है, जिनमें केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) पाठ्यक्रम लागू होगा। अगले वर्ष ऐसे 25 और स्कूल खोलने की योजना है। उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक रूप से कमजोर अल्पसंख्यक परिवारों के 5,000 मेधावी छात्रों को 50,000 मूल्य के लैपटॉप दिए जाएंगे।

बजट में सामाजिक कल्याण के तहत जैन, बौद्ध और सिख समुदायों के विकास के लिए 100 करोड़ आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा बौद्ध धम्माचार्यों को नई सहायता योजना के तहत 6,000 मासिक मानदेय दिया जाएगा। सांस्कृतिक पहल के तहत बी. आर. अम्बेडकर और अन्य सामाजिक सुधारकों के लेखन का उर्दू में अनुवाद कराया जाएगा ताकि उर्दू भाषी पाठकों तक उन्हें आसानी से पहुंचाया जा सके। आर्थिक सशक्तिकरण के लिए बेरोजगार अल्पसंख्यक युवाओं को मोबाइल फूड बिजनेस (फास्ट-फूड ट्रक, किचन यूनिट आदि) शुरू करने के लिए 75 प्रतिशत तक सब्सिडी (अधिकतम 3 लाख) देने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

इसके अलावा प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में स्थित वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का विकास सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत किया जाएगा, जिससे राजस्व बढ़ाने और संपत्तियों के बेहतर उपयोग का लक्ष्य रखा गया है।

सरकार का कहना है कि इन पहलों का उद्देश्य राज्य में अल्पसंख्यक समुदायों के लिए सामाजिक कल्याण के साथ-साथ आर्थिक अवसरों को भी बढ़ावा देना है।

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