बेंगलुरु , सितंबर 15 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने मंगलवार को विधायकों से अपील की कि वे राज्य में बिगड़ते सूखे के हालात को लेकर घबराएं नहीं और न ही इस पर राजनीति करें। सरकार ने संभावित पेयजल और बिजली की कमी से निपटने की तैयारी शुरू कर दी है और किसानों की चिंताओं पर चर्चा के लिए विशेष सत्र बुलाने की योजना बनाई है।

श्री शिवकुमार की यह अपील ऐसे समय में आई है जब उम्मीद के मुताबिक व्यापक बारिश नहीं हुई है, जिससे राज्य के कई हिस्सों में सूखे जैसे गंभीर हालात बन गए हैं और खेती तथा पानी की उपलब्धता पर असर पड़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।

उन्होंने कहा, "मैं सभी विधायकों से अपील करता हूं कि वे घबराएं नहीं। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक प्रदर्शन करने की कोई जरूरत नहीं है। सरकार हालात को लेकर पूरी तरह गंभीर है और स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।"मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को जानकारी मिली थी कि लगभग एक हफ्ते तक व्यापक बारिश होगी लेकिन कुछ इलाकों को छोड़कर उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हुई। उन्होंने कहा, "हमें बताया गया था कि एक हफ्ते तक लगातार बारिश होगी लेकिन बारिश नहीं हुई। कुछ इलाकों में थोड़ी बारिश हुई है लेकिन बाकी जगहों पर ज्यादातर सूखा ही है।"श्री शिवकुमार ने कहा कि सरकार अब संभावित पेयजल संकट और बिजली की उपलब्धता से जुड़ी चुनौतियों से निपटने की तैयारी कर रही है। यानी सूखे का असर सिर्फ खेती-किसानी तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि आने वाले समय में पेयजल और बिजली की व्यवस्था पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने कहा, "हमें पीने के पानी के लिए तैयारी करनी होगी। बिजली से जुड़ी समस्याएं भी हैं। हमें लोगों को इस स्थिति के लिए मानसिक रूप से तैयार करना होगा।"मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य के अलग-अलग हिस्सों से रिपोर्ट इकट्ठा की जा रही हैं और आगे के फैसले लेने से पहले उन्होंने गृह मंत्री जी परमेश्वर के साथ स्थिति पर चर्चा की है। सरकार ने किसानों की समस्याओं और सूखे की उभरती स्थिति पर चर्चा के लिए एक विशेष सत्र बुलाने का भी फैसला किया है।

मंगलुरु में होने वाली कैबिनेट बैठक में किसानों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की जाएगी, जिसके बाद सरकार आगे के उपायों और घोषणाओं पर फैसला करेगी।

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