बेंगलुरु , सितंबर 22 -- कर्नाटक में सूखे से प्रभावित तालुकों की सूची में अपने निर्वाचन क्षेत्रों को शामिल न किए जाने से कांग्रेस विधायकों में नाराज़गी है। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने मंगलवार शाम को कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की एक अहम बैठक बुलाई है, ताकि सत्ताधारी पार्टी के भीतर बढ़ती बेचैनी को शांत किया जा सके।
यह बैठक शाम 7 बजे एक निजी होटल में होनी है। यह बैठक इसलिए भी अहम है क्योंकि सरकार पर अपने ही विधायकों का दबाव बढ़ रहा है, जबकि सूखे की स्थिति पर चर्चा के लिए विधानसभा का विशेष सत्र चल रहा है।
रिपोर्टाें के मुताबिक कई विधायक इस बात से नाराज़ हैं कि उनके तालुकों को सूखे की घोषणा में शामिल नहीं किया गया है, जबकि उनका दावा है कि ज़मीनी स्तर पर गंभीर संकट और फ़सलों का नुकसान हुआ है; वहीं, पड़ोसी तालुकों को इसमें शामिल किया गया है।
यह मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया है क्योंकि किसान जवाब और राहत के लिए अपने विधायकों से संपर्क कर रहे हैं, जिससे विधायकों को यह बताना पड़ रहा है कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों को सूखे की सूची से क्यों बाहर रखा गया है। उम्मीद है कि सीएलपी की बैठक से श्री शिवकुमार को इन शिकायतों पर सीधे बात करने और पार्टी के विधायकों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की दिशा में काम करने का मौका मिलेगा।
सूखे को लेकर यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब कांग्रेस के भीतर अपने मंत्रियों और विधायकों के बीच तालमेल को लेकर चिंताएं हैं। कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल और रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हाल ही में पार्टी में बेहतर तालमेल की ज़रूरत पर ज़ोर दिया था। इस विशेष सत्र ने सरकार की चुनौती को और बढ़ा दिया है। भाजपा और जनतादल (एस) ने मांग की है कि तीन दिन के सत्र को बढ़ाकर 10 दिन किया जाए। उनका तर्क है कि सभी 224 विधायकों को अपने-अपने चुनाव क्षेत्रों से जुड़े सूखे के मुद्दों को उठाने का मौका मिलना चाहिए।
कार्य मंत्रणा समिति ने अभी तक इस सत्र को तीन दिन के लिए तय किया है। हालांकि, इसे एक या दो दिन और बढ़ाने पर चर्चा हो रही है, खासकर अगर सरकार विधायकों को सूखे से जुड़ी शिकायतें उठाने के लिए और समय देने का फ़ैसला करती है।
इस सत्र के दौरान सरकार को कस्तूरीरंगन रिपोर्ट पर भी सवालों का सामना करना पड़ सकता है खासकर पश्चिमी घाट क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायकों की ओर से। इस तरह सीएलपी की बैठक सिर्फ़ एक आम विधायी-पार्टी बैठक से कहीं ज़्यादा अहम हो सकती है, क्योंकि इसमें सूखे की घोषणा, राहत के उपाय, चुनाव क्षेत्रों की शिकायतें और कांग्रेस विधायक दल के भीतर तालमेल जैसे मुद्दों पर खास तौर पर चर्चा होने की उम्मीद है।
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