Massive CID probe exposes Rs 2,400 crore Ponzi racket in Karnatakaबेंगलुरु, 07 जून (वार्ता) पोंज़ी स्कीम के तौर पर चल रहे एक बड़े वित्तीय घोटाले ने कर्नाटक में 40,000 से ज़्यादा निवेशकों को मुश्किल में डाल दिया है।
जांचकर्ताओं का अनुमान है कि राज्य में हाल के वर्षों के सबसे बड़े घोटालों में से एक इस मामले में लगभग 660 करोड़ रुपये का है।
अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने एक ऐसे गैर-विनियमित जमा रैकेट का खुलासा किया है जिसे अधिकारी बहुत सावधानी से चलाया गया रैकेट बता रहे हैं। आरोप है कि इसे शिवानंद नीलन्नवर ने चलाया था। इस गिरोह ने लोगों से ज़्यादा रिटर्न का वादा करके और नए निवेशकों से लगातार पैसा लेकर पुराने निवेशकों को भुगतान करते हुए लगभग 2,400 करोड़ रुपये जमा किए थे। सीआईडी के उप महानिरीक्षक भीमशंकर गुलेद ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि धोखाधड़ी के स्पष्ट शुरुआती सबूत हैं। उन्होंने बताया कि आरोपी ने इस स्कीम को टिकाऊ सीमा से कहीं आगे तक चलाया और एक क्लासिक चेन-जैसे स्ट्रक्चर के ज़रिए बढ़ती देनदारियों को छिपाए रखा। जांचकर्ताओं ने कहा कि यह मॉडल एक आम पोंज़ी मैकेनिज्म पर काम करता था, जिसमें नये निवेशकों से मिले पैसे का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान करने के लिए किया जाता था और यह तब तक चलता रहा जब तक कि बाहर जाने वाला पैसा (आउटफ़्लो) अंदर आने वाले पैसे (इनफ़्लो) से ज़्यादा नहीं हो गया, जिससे यह सिस्टम ढह गया।
उन्होंने कहा, "यह साबित हो चुका है कि शिवानंद नीलन्नवर ने धोखाधड़ी की और एक पोंज़ी स्कीम चला रहे थे।"Bengaluru, June 7 (UNI) A massive financial fraud operating as a Ponzi scheme has left over 40,000 investors in Karnataka in distress, with investigators estimating a shortfall of around Rs 660 crore in one of the state's largest such scams in recent years.The Crime Investigation Department (CID) has exposed what officials describe as a meticulously run unregulated deposit racket allegedly operated by Shivananda Neelannavar, which allegedly collected nearly Rs 2,400 crore from the public by promising high returns and sustaining payouts through continuous inflows from new investors. CID Deputy Inspector General of Police Bhimashankar Guled, addressing a press briefing, said there is clear prima facie evidence of fraud, noting that the accused continued the scheme well beyond sustainable limits, masking mounting liabilities through a classic chain-like structure. Investigators said the model functioned on a typical Ponzi mechanism-using funds from new investors to pay earlier investors-until the outflows exceeded inflows, triggering collapse. "It has been proven that Shivananda Neelannavar committed fraud and was running a Ponzi scheme," Guled said.पुलिस के अनुसार इकट्ठा किए गए 2,400 करोड़ रुपये में से कुछ हिस्सा निवेशकों को वापस कर दिया गया, जबकि लगभग 540 करोड़ रुपये शेयर बाज़ार के निवेश में लगा दिए गए, जिससे करीब 170 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। अधिकारियों का अनुमान है कि कुल कमी 660 करोड़ रुपये की है, जिसमें से लगभग 330 करोड़ रुपये की वसूली चल रही अटैचमेंट और रिकवरी की कार्यवाही से होने की उम्मीद है। इस घोटाले से लगभग 40,700 निवेशक प्रभावित हुए हैं, जिनमें से कई कर्नाटक और पड़ोसी महाराष्ट्र से हैं, जो इस अभियान के बड़े भौगोलिक दायरे को दिखाता है। अधिकारियों ने यह भी बताया कि आरोपी के एक सहयोगी ने कथित तौर पर 55 करोड़ रुपये अपने निजी खातों में हस्तांतरित कर लिए, जिससे फंड के गलत इस्तेमाल का दायरा और बढ़ गया।
सीआईडी ने अटैचमेंट की कार्यवाही तेज़ कर दी है, पाँच लग्ज़री गाड़ियाँ ज़ब्त कर ली हैं और 11 और गाड़ियों को ज़ब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही आरोपी से जुड़ी संपत्तियों का पता भी लगाया जा रहा है। प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद, जाँचकर्ताओं ने पाया कि संबंधित खातों में चार से पांच करोड़ रुपये जमा होते रहे, जिससे पता चलता है कि जाँच के दौरान भी कुछ गतिविधियाँ जारी थीं। अधिकारियों ने कहा कि पैसों के लेन-देन का पता लगाना बहुत मुश्किल है, क्योंकि अब तक 30 बैंक खातों की पहचान की गई है। इनमें से सात खातों से ज़्यादातर लेन-देन हुए, और अकेले एक खाते में कथित धोखाधड़ी में इस्तेमाल की गई वित्तीय लेयरिंग की गहराई और पैमाने को दिखाते हुए, लेन-देन के 36,000 से ज़्यादा पन्नों का रिकॉर्ड है।
सीआईडी ने यह भी संकेत दिया है कि फंड के बहाव और लाभार्थियों के कनेक्शन की बढ़ती जाँच के तहत फ़िल्म हस्तियों से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है। अब इस मामले को 'अनियंत्रित जमा योजनाओं पर प्रतिबंध' (बीयूडीएस ) कानून के तहत बने प्राधिकरण को सौंप दिया गया है, जिसके प्रमुख आदित्य अमलन बिस्वास हैं। वे संपत्ति की रिकवरी और पीड़ितों को राशि बांटने की देखरेख करेंगे, जबकि जाँचकर्ता कथित घोटाले से जुड़ी बाकी रकम का पता लगाना जारी रखेंगे।
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