बेंगलुरु , अक्टूबर 28 -- कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने बुधवार को निकाय चुनावों के लिए मतदाता पहचान पत्रों की छपाई में कथित अनियमितताओं की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग की।
श्री अशोक ने सवाल उठाया कि 90 लाख कार्डों पर लगभग 20 करोड़ रुपये क्यों खर्च किये गये जबकि बेंगलुरु की संशोधित मतदाता सूची में केवल 59 लाख मतदाता ही थे। उन्होंने निविदा के समय, चयन प्रक्रिया और ग्रेटर बेंगलुरु प्राधिकरण (जीबीए) चुनावों से पहले छापे गए अतिरिक्त पहचान पत्रों के भविष्य पर भी सवाल उठाये। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया में जनता के पैसे बर्बाद हुए हैं।
उन्होंने कहा, "कर्नाटक में राज्य मतदाता पहचान पत्रों के मामले में 20 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला हुआ है। कर्नाटक सरकार ने निगम चुनावों के लिए राज्य मतदाता पहचान पत्र जारी करने के लिए 20 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की थी।" उन्होंने सवाल किया कि जब चुनाव आयोग पहले ही मतदाता पहचान पत्र जारी कर चुका था तो अलग से मतदाता पहचान पत्र छापने की क्या ज़रूरत थी? उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किये बिना ही वित्त की मंज़ूरी दी और निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ा दी। उन्होंने निविदा प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा, "सिर्फ एक ही प्रस्ताव आया था और कार्ड तुरंत छाप दिये गये।"श्री अशोक ने 14 मई को चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' की घोषणा के बाद निविदा प्रक्रिया शुरू करने के फैसले पर भी सवाल उठाये। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग ने इस घोषणा के एक दिन बाद ही निविदा आमंत्रित किये। उन्होंने कहा कि छापे गए कार्डों की संख्या एवं संशोधित मतदाता सूची में दर्ज मतदाताओं की संख्या के बीच के अंतर पर स्पष्टीकरण दिया जाना चाहिए। एसआईआर प्रक्रिया के बाद जारी अंतिम मतदाता सूची का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि बेंगलुरु में लगभग 59 लाख मतदाता हैं जबकि राज्य सरकार की कवायद के तहत 90 लाख वोटर आईडी कार्ड छापे गये।
उन्होंने पूछा, "अब, एसआईआर में, कल घोषित मतदाता सूची में केवल 59 लाख मतदाता शामिल हैं। आपने पहले ही 90 लाख कार्ड छाप लिये हैं। बाकी 31 लाख मतदाताओं के वोटर आईडी कार्ड का क्या होगा?"उन्होंने आगे आरोप लगाया कि ये कार्ड लगभग चार महीने पहले ही छपवाकर वितरण के लिए निगम को भेज दिये गये थे। उन्होंने मांग की कि सरकार इनकी वर्तमान स्थिति बताये और यह स्पष्ट करे कि मतदाता सूची में संशोधन के बाद बाकी कार्ड किस तरह वितरित किये जायेंगे।
श्री अशोक ने कहा, "बेंगलुरु में लगभग 59 लाख मतदाता ही हैं लेकिन आपने 90 लाख कार्ड छपवा दिये हैं। बाकी 31 लाख कार्डों का क्या होगा? यह एक बड़ा सवाल है।"विपक्ष के नेता ने ऐसे समय में हुए खर्च पर भी सवाल उठाये जब राज्य सरकार ने अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने तर्क दिया कि सार्वजनिक धन के उपयोग की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "यह जनता का पैसा है। 20 करोड़ रुपये कोई छोटी रकम नहीं है। यह एक बड़ी रकम है और आपने जनता के पैसे को बर्बाद किया है।" साथ ही, उन्होंने सीबीआई जांच की अपनी मांग को फिर से दोहराया।
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