बेंगलुरु , जुलाई 03 -- कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि राज्य की कांग्रेस सरकार चुनाव आयोग की सत्यापन प्रक्रिया का बड़े पैमाने पर उल्लंघन करके अवैध बंगलादेशी प्रवासियों को मतदाता के रूप में पंजीकृत करने की सुविधा दे रही है।
श्री अशोक ने यहां संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का अनुमान है कि कर्नाटक में 20 लाख से 25 लाख अवैध बंगलादेशी प्रवासी रह रहे हैं तथा ये लोग बेंगलुरु, कोडागु, चिकमगलूर और अन्य जिलों में वे कथित तौर पर कॉफी बागानों, कारखानों और अन्य क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह जिम्मेदार लोगों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग करते हुए चुनाव आयोग को दस्तावेजी सबूत सौंपेंगे।
उन्होंने आरोप लगाया कि बेंगलुरु के बाहरी इलाके में कोगिलु में लगभग 15 एकड़ भूमि को बंगलादेशी प्रवासियों के लिए सैकड़ों आवासीय स्थलों में बदल दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के विरोध प्रदर्शनों ने प्रशासन को इस बस्ती को हटाने के लिए मजबूर कर दिया।
वर्तमान में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के कार्यान्वयन पर सवाल उठाते हुए श्री अशोक ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के उन दिशानिर्देशों की अनदेखी की जा रही है जिनके तहत बूथ स्तर के अधिकारियों को घर-घर जाकर सत्यापन करना, पात्र निवासियों को प्रपत्र वितरित करना और बाद में उन्हीं घरों से भरे हुए आवेदन एकत्र करना अनिवार्य है। उन्होंने दावा किया कि आवेदन पत्र मस्जिदों के बाहर और सार्वजनिक स्थानों पर थोक में बांटे जा रहे हैं, जिससे लोग बिना किसी घरेलू सत्यापन के प्रपत्र ले पा रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की प्रक्रिया ने एसआईआर अभ्यास के उद्देश्य को ही विफल कर दिया। इससे अवैध प्रवासियों के लिए मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के अवसर पैदा हो गये हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जारी सत्यापन 2002 की मतदाता सूची पर आधारित था, लेकिन कई मतदान केंद्रों से संबंधित रिकॉर्ड चुनाव आयोग की वेबसाइट से गायब हो गए थे। येलहंका विधानसभा क्षेत्र का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया कि पांच मतदान केंद्रों के रिकॉर्ड गायब थे। इससे वास्तविक मतदाताओं का सत्यापन करना मुश्किल हो गया और बाद में फर्जी दस्तावेज पेश किए जाने की गुंजाइश बन गयी।
उन्होंने कांग्रेस सरकार पर एसआईआर प्रक्रिया को राज्य की गारंटी योजनाओं से जोड़ने का प्रयास करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि लाभार्थियों को यह विश्वास दिलाकर गुमराह किया जा रहा है कि यदि वे एसआईआर प्रक्रिया को पूरा नहीं करते हैं तो वे कल्याणकारी लाभ खो देंगे।
श्री अशोक ने बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त के साथ हाल ही में हुई बातचीत का हवाला देते हुए दावा किया कि पिछले चार महीनों के दौरान कर्नाटक सरकार के लगभग 65 लाख रुपये के आधिकारिक खर्च पर लगभग 250 अवैध बंगलादेशी प्रवासियों को हवाई मार्ग से वापस भेजा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध प्रवासियों के पंजीकरण को आसान बनाने के लिए आधार कार्ड और सहायक रिकॉर्ड सहित फर्जी पहचान दस्तावेज बनाए जा रहे थे।
विपक्ष के नेता ने घोषणा की कि वह एसआईआर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग और कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी को दस्तावेजों, तस्वीरों और वीडियो के साथ एक आधिकारिक शिकायत सौंपेंगे। उन्होंने बूथ स्तर के अधिकारियों, सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और अन्य अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की। उन्होंने उन लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की जिन्होंने कथित तौर पर इन अधिकारियों को नियम विरूद्ध काम करने के निर्देश दिये थे। उन्होंने जोर दिया कि इन मुद्दों में राष्ट्रीय सुरक्षा, चुनावी प्रक्रिया की अखंडता और संविधान की रक्षा शामिल है। उन्होंने आह्वान किया कि मतदाता सूची में केवल वास्तविक भारतीय नागरिक ही शामिल किए जाएं।
कर्नाटक सरकार या चुनाव आयोग ने विपक्ष के नेता के इन आरोपों पर तात्कालिक प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की है।
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