बेंगलुरु , अप्रैल 14 -- कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया , उप मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार सहित विभिन्न राजनीतिक नेताओं ने मंगलवार को डा. बी आर अंबेडकर को श्रद्धांजलि दी और संविधान के निर्माता और भारत में सामाजिक न्याय के अग्रणी के रूप में उनकी विरासत पर रोशनी डाली।

मुख्यमंत्री श्री सिद्धारमैया ने सबसे खास बातों में से एक यह कहते हुए कही कि ''बाबा साहेब के जन्म ने हम सभी के जन्मों को मतलब दिया।'' उन्होंने कहा कि डॉ अंबेडकर के जीवन और सोच ने भारतीय समाज को बदल दिया, जिससे लाखों लोगों को सम्मान, आत्म-सम्मान और संवैधानिक अधिकार मिले, जिन्हें ऐतिहासिक रूप से इनसे वंचित रखा गया था। उन्होंने आगे कहा कि डॉ अंबेडकर के जन्म ने जाति-आधारित भेदभाव और सामाजिक असमानता के खिलाफ एक बदलाव लाने वाले युग की शुरुआत की।

पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने डॉ अंबेडकर को एक महान मानवतावादी बताया जिन्होंने अपनी ज़िंदगी एक बराबरी वाला समाज बनाने के लिए समर्पित कर दी और इस बात पर ज़ोर दिया कि शिक्षा उनके समानता और कमजोर वर्गों के लिए सशक्तिकरण के संदेश का केंद्र थी।

पूर्व मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने डॉ अंबेडकर को एक महान विचारक और भारत के संवैधानिक लोकतंत्र का वास्तुकार बताया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे के उनके आदर्श देश के सामाजिक न्याय के ढांचे के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत के तौर पर काम करते रहेंगे।

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजयेंद्र येदियुरप्पा ने कहा कि डॉ अंबेडकर, जिन्हें बड़े पैमाने पर ''समानता का राजदूत'' माना जाता है, ने भारतीयों में आत्म-सम्मान और गरिमा की प्रेरणा दी और संवैधानिक परिकल्पना का एक ऐसा मॉडल पेश किया जो दुनिया भर में गूंजता रहता है।

उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मसौदा समिति में डॉ अंबेडकर के नेतृत्व को याद करते हुए कहा कि उन्होंने यह पक्का किया कि संविधान में स्वतंत्रता, समानता और गरिमा मजबूती से शामिल हों, और इस बात पर ज़ोर दिया कि लोकतंत्र को हमेशा समाज के सबसे कमजोर वर्गों की रक्षा करनी चाहिए।

पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि समानता और न्याय के लिए डॉ अंबेडकर का संघर्ष पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश बना हुआ है और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए गरिमा का उनका विज़न युवाओं को प्रेरित करता रहता है।

नेताओं ने पार्टी लाइन से हटकर दोहराया कि डॉ अंबेडकर की विरासत संविधान का ड्राफ्ट बनाने से कहीं आगे है, बल्कि वह एक बदलाव लाने वाली ताकत के तौर पर खड़े हैं, जिन्होंने भारत की सामाजिक प्रणाली को नया रूप दिया और इसके लोकतांत्रिक मूल्यों को निर्देशित करना जारी रखा है।

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