बेंगलुरु , जून 09 -- वरिष्ठ कांग्रेस नेता जमीर अहमद खान से जुड़ा एक कथित ऑडियो विवाद कर्नाटक में मंत्रिमंडल विस्तार के बीच चर्चा का विषय बन गया है।
इस विवाद के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे हैं। यह पूरा विवाद एक ऑडियो क्लिप के इर्द-गिर्द घूम रहा है, जिसमें कथित तौर पर श्री खान और स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ता मोहम्मद सिराज के बीच दावणगेरे दक्षिण उपचुनाव प्रचार के दौरान हुई बातचीत है। आरोप है कि इस रिकॉर्डिंग में श्री खान उन मतदाताओं को जो कांग्रेस उम्मीदवार को वोट नहीं देना चाहते थे, किसी अन्य उम्मीदवार के पक्ष में करने की बात कह रहे हैं। इसे कांग्रेस के ही एक धड़े ने सीधे तौर पर पार्टी विरोधी काम करार दिया है।
माना जा रहा है कि मंत्रियों की पहली सूची से श्री खान का नाम कटना इसी विवाद का नतीजा है, जिसने अब सत्तारुढ़ पार्टी के भीतर मंत्री पद की जंग को और तेज कर दिया है।
यह मामला अब एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल चुका है। कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस समिति के महासचिव डी. बसवराज ने पार्टी आलाकमान के पास इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है और ऑडियो रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है। उन्होंने उपचुनाव के दौरान पार्टी के हितों से समझौता करने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अभी तक हालांकि इस ऑडियो क्लिप की सच्चाई की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसका राजनीतिक असर तुरंत देखने को मिला है। पार्टी के नेता और कार्यकर्ता खुले तौर पर इस विवाद को मंत्रिमंडल गठन के पहले श्री खान को बाहर रखे जाने से जोड़कर देख रहे हैं और आने वाले विस्तार में भी यह मुख्य मुद्दा बन गया है।
दूसरी तरफ, श्री खान ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने इस ऑडियो क्लिप को पूरी तरह से फर्जी और राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने साफ कहा है कि वह किसी भी तरह की जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने अपने विरोधियों को इन दावों को सच साबित करने की चुनौती दी है।
इस विवाद के बाद श्री खान के समर्थकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। दावणगेरे में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया और चेतावनी दी कि यदि उन्हें लगातार नजरअंदाज किया गया, तो एक बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। कुछ नेताओं ने तो बेंगलुरु में भी विरोध प्रदर्शन करने की धमकी दी है। उनका कहना है कि श्री खान का प्रभाव सिर्फ उनके क्षेत्र तक सीमित नहीं है, इसलिए वे सरकार में एक बड़े पद के हकदार हैं।
इस बीच श्री खान के इस विवाद ने मंत्रिमंडल में जगह बनाने की रेस में शामिल अन्य कांग्रेस विधायकों की दावेदारी को और मजबूत कर दिया है। दावणगेरे जिले से ही मंत्री पद की मांग को लेकर एस.एस. मल्लिकार्जुन, शिवगंगा बसवराज और डी.जी. शांतनगौड़ा के समर्थकों ने अपनी पैरवी तेज कर दी है और हर गुट अपने नेता को मंत्री बनाने के लिए आलाकमान पर दबाव बना रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम कांग्रेस नेतृत्व के भीतर बढ़ते गुटीय दबाव को उजागर करता है, जो उसे मंत्रिमंडल की खाली सीटों को भरने से पहले झेलना पड़ रहा है। क्षेत्रीय इच्छाओं, जातिगत समीकरणों और सामुदायिक प्रतिनिधित्व के बीच पार्टी को एक बेहद बारीक संतुलन बनाना होगा, जो फिलहाल काफी चुनौतीपूर्ण नजर आ रहा है।
हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित