बेंगलुरु , जनवरी 30 -- कर्नाटक में बेंगलुरु-मैसूर अवसंचरना गलियारा (बीएमआईसी) परियोजना के दस्तावेज़ गायब हो गये हैं।

ये दस्तावेज कभी अदालत के रिकॉर्ड में दर्ज थे, लेकिन अब कथित तौर पर सरकारी कस्टडी से गायब हो गए हैं, जिससे इस परियोजना को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है।

भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता टीजे अब्राहम ने पुलिस में शिकायत दर्ज करायी है और बताया है कि बीएमआसी से जुड़े कुछ अहम दस्तावेज़, जिनका ज़िक्र पहले लोकायुक्त अदालत ने किया था और जिन पर भरोसा किया था, अब वो सरकार के पास नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के जरिये हाल ही में इन दस्तावेजों के बारे में जानकारी मांगी, तो जिसके जवाब में लोक निर्माण विभाग ने "उपलब्ध नहीं" बताया है।

इस खुलासे से करीब 11,000 करोड़ रुपये के बड़े ज़मीन घोटाले के आरोपों को फिर हवा मिल गयी है। यह विवाद 29 जनवरी आरटीआई की प्रतिक्रियाओं के बाद शुरू हुआ, जिसमें शिकायतकर्ता को बताया गया कि कई ज़रूरी फाइलें जिनमें सहमति समझौते, आधिकारिक ज्ञापन, बैठकों की कार्यवाही और अंतर-विभागीय पत्राचार शामिल हैं सरकारी रिकॉर्ड में नहीं मिल पाये हैं। गौरतलब है कि 2012 में पारित एक न्यायिक आदेश में इन्हीं दस्तावेज़ों का खास तौर पर ज़िक्र किया गया था।

श्री अब्राहम ने आरोप लगाया कि अदालत में पेश की गई फाइलों का अचानक गायब होना बीएमआईसी परियोजना के लिए ज़मीन की ज़रूरतों में कथित हेरफेर से जुड़े सबूतों को मिटाने की जानबूझकर की गई कोशिश की ओर इशारा करता है। शिकायत के अनुसार, परियोजना के लिए तय की गई ज़मीन को धीरे-धीरे मूल अनुमानों से कहीं ज़्यादा बढ़ा दिया गया, जिसके कारण हजारों एकड़ सरकारी ज़मीन पर गैर-कानूनी कब्ज़ा किया गया।

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