बेंगलुरु , जुलाई 30 -- कर्नाटक में बेंगलुरु के पुलाकेशी नगर में गुरुवार को मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में लगे एक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) पर घर-घर जाकर सत्यापन के दौरान कथित तौर पर हमला होने के बाद कर्नाटक की वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया।
इस घटना ने चुनाव से जुड़े काम करने वाले अधिकारियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिये हैं। चुनाव अधिकारी पर हुए कथित हमले से राजनीतिक टकराव शुरू हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी कांग्रेस चुनाव मशीनरी को डराने-धमकाने की कोशिश कर रही है, जबकि कांग्रेस ने इस आरोप को वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया का राजनीतिकरण करने की कोशिश बताते हुए खारिज कर दिया है।
भाजपा का आरोप है कि अधिकारी पर उनकी ड्यूटी के दौरान हमला किया गया और उन्होंने पुलाकेशी नगर विधानसभा क्षेत्र से जुड़े कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर एसआईआर प्रक्रिया में बाधा डालने का आरोप लगाया। पार्टी ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि चुनाव अधिकारियों के काम में किसी भी तरह का दखल लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर चोट करता है।
भाजपा नेताओं ने कहा कि चुनावी सत्यापन में शामिल अधिकारियों को बिना किसी डर के और आज़ादी से काम करने दिया जाना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग और पुलिस से अपील की कि वे इस सत्यापन प्रक्रिया में लगे कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
इस घटना ने कर्नाटक में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज़ कर दी है। विपक्ष का आरोप है कि वोटरों के वेरिफिकेशन को प्रभावित करने की कोशिशें की जा रही थीं।
भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए, कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने विपक्षी पार्टी पर राजनीतिक फ़ायदे के लिए वोटर लिस्ट में सुधार की प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा करने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बिना सबूत के लगाए गए आरोपों का इस्तेमाल चुनाव प्रक्रिया में जनता के भरोसे को कम करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
भाजपा ने इस घटना को लेकर पुलाकेशी नगर से कांग्रेस विधायक ए.सी. श्रीनिवास पर भी निशाना साधा है और पार्टी कार्यकर्ताओं की इसमें भूमिका होने का आरोप लगाया है, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
उम्मीद है कि चुनाव अधिकारी इस घटना पर रिपोर्ट सौंपेंगे, जबकि पुलिस कथित हमले से जुड़े हालात की जांच कर रही है।
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब एसआईआर प्रक्रिया ने चुनाव अधिकारियों को एक ऐसी राजनीतिक रूप से संवेदनशील प्रक्रिया के केंद्र में ला दिया है, जिसमें वोटर लिस्ट का वेरिफिकेशन और उसे अपडेट करना शामिल है।
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