बेंगलुरु , मार्च 07 -- साइबर सुरक्षा के विशेषज्ञों ने कर्नाटक सरकार के 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव की सफलता पर आशंका जतायी है।
साइबर सुरक्षा के विशेषज्ञों के अनुसार इस उपाय की सफलता मजबूत डिजिटल पहचान सत्यापन और प्रवर्तन तंत्र पर निर्भर करेगी। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की ओर से प्रस्तुत वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इस प्रस्ताव का उल्लेख किया था, जिसने बहस छेड़ दी है। लोग चर्चा कर रहे हैं कि सरकार अपनी महत्वाकांक्षी डिजिटल एजेंडा को आगे बढ़ाते हुए युवा उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेंगी।
साइबर सुरक्षा कंपनी सिक्योरआइज़ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कर्मेन्द्र कोहली ने कहा कि यह प्रस्ताव डिजिटल जिम्मेदारी को बढ़ावा देने की दिशा में समयोचित कदम है, लेकिन इससे जटिल तकनीकी और सुरक्षा चुनौतियां भी सामने आती हैं। उन्होंने कहा, "16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रस्तावित सोशल मीडिया प्रतिबंध एक समयोचित कदम है, लेकिन इसकी सफलता पूरी तरह मजबूत डिजिटल पहचान सत्यापन और प्रवर्तन तंत्र पर निर्भर करेगी, जो स्वभावतः साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियां हैं।"इस बीच बैंगलोर चैंबर ऑफ़ इंडस्ट्री एंड कॉमर्स (बीसीआईसी) ने राज्य सरकार के बजट स्वागत किया, खासकर सुक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई), अवसंरचना विकास और नवाचार को समर्थन देने पर ध्यान केंद्रित करने लिए। बीसीआईसी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं इसकी आंतरिक व्यापार समिति के अध्यक्ष के रवि ने कहा कि बजट में राज्य के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मज़बूत करते हुए आर्थिक विकास के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण दिखाया गया है। उन्होंने कहा कि बीसीआईसी वित्तीय प्रोत्साहन, कौशल विकास कार्यक्रम और बिज़नेस करने में आसानी के मकसद से किये गये सुधारों के ज़रिए एमएसएमई को समर्थन देने की सरकार की प्रतिबद्धता की तारीफ़ करता है, जिससे पूरे राज्य में विनिर्माण क्षमता बढ़ने और रोज़गार के मौके पैदा होने की उम्मीद है।
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